“महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पॉलिटिक्स प्रो मैक्स’ का नया अध्याय शुरू हो गया है”
अकोला/ठाणे 07 / 01 / 2026 संतोष सेठ की रिपोर्ट
हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अकोला जिले की अकोट नगर परिषद और ठाणे की अंबरनाथ नगर पालिका में ऐसे गठबंधन देखने को मिले हैं, जिनकी कल्पना भी मुश्किल थी। कहीं कट्टर विरोधी रही AIMIM और बीजेपी साथ हैं, तो कहीं बीजेपी और कांग्रेस ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया है।
कुल 35 सीटों में से 33 सीटों पर चुनाव हुए, जिनके नतीजे इस प्रकार रहे:
| पार्टी का नाम | जीती गई सीटें |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 11 |
| कांग्रेस | 06 |
| AIMIM | 05 |
| प्रहार जनशक्ति (बच्चू कडू) | 03 |
| शिवसेना (UBT) | 02 |
| एनसीपी (अजित पवार) | 02 |
| वंचित बहुजन आघाडी (VBA) | 02 |
| एनसीपी (शरद पवार) | 01 |
| शिवसेना (शिंदे गुट) | 01 |
अकोट नगर परिषद की 35 में से 33 सीटों पर हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। हालांकि, बीजेपी की माया धुले ने सीधे चुनाव में मेयर (नगराध्यक्ष) का पद जीत लिया, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 17 पार्षदों का समर्थन उनके पास नहीं था।
बहुमत हासिल करने के लिए बीजेपी ने ‘अकोट विकास मंच’ नामक एक मोर्चा बनाया है। इस मोर्चे में शामिल दलों की सूची हैरान करने वाली है:
भारतीय जनता पार्टी (BJP): 11 पार्षद
AIMIM: 5 पार्षद (जिनमें से 4 ने पार्टी लाइन से हटकर समर्थन दिया है)
प्रहार जनशक्ति (बच्चू कडू): 03 पार्षद
शिवसेना (UBT): 02 पार्षद
शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 01 पार्षद
NCP (अजित पवार): 02 पार्षद
NCP (शरद पवार): 01 पार्षद
इस गठबंधन के बाद ‘विकास मंच’ की कुल ताकत 26 (25 पार्षद + 1 मेयर) हो गई है। बीजेपी के रवि ठाकुर को इस मोर्चे का गटनेता (ग्रुप लीडर) नियुक्त किया गया है, जिसका मतलब है कि अब AIMIM और शिवसेना (UBT) के पार्षदों को भी बीजेपी नेता का ‘व्हिप’ मानना होगा।
अकोट जैसा ही हाल ठाणे के अंबरनाथ में दिखा, जहाँ एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए बीजेपी और कांग्रेस एक साथ आ गए। यहाँ बीजेपी (14), कांग्रेस (12) और एनसीपी-अजित पवार (4) ने मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का गठन किया है।
इस असामान्य गठबंधन की खबर जैसे ही राज्य स्तर पर फैली, राजनीति गरमा गई है।
देवेंद्र फडणवीस का रुख: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस या AIMIM के साथ कोई भी वैचारिक गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इन गठबंधनों को तुरंत तोड़ने के निर्देश दिए हैं और स्थानीय नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
AIMIM की प्रतिक्रिया: AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि पार्टी बीजेपी के साथ कभी नहीं जा सकती। उन्होंने अकोला इकाई से रिपोर्ट मांगी है और बागी पार्षदों पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
विपक्ष का हमला: शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा है कि जो पार्टी “कांग्रेस मुक्त भारत” की बात करती थी, वह आज सत्ता के लिए कांग्रेस और ओवैसी के साथ खड़ी है।
अकोट में अब केवल कांग्रेस (6 सीटें) और वंचित बहुजन आघाडी (2 सीटें) ही मुख्य विपक्ष की भूमिका में बची हैं। 13 जनवरी को होने वाले उपाध्यक्ष और अन्य पदों के चुनाव में यह ‘अकोट विकास मंच’ अपनी एकजुटता का परीक्षण करेगा।
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