केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'एल नीनो' के संभावित प्रभावों से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए राज्यों में कॉन्टिंजेंसी प्लान को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा एक्शन: ‘एल नीनो’ और मानसून की बेरुखी से निपटने के लिए 262 जिलों पर खास नजर, कॉन्टिंजेंसी प्लान लागू करने के सख्त निर्देश”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देशभर में मानसून की स्थिति, खरीफ फसलों की बुवाई और ‘एल नीनो’ (El Nino) के संभावित प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट मोड में आ गई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में एक उच्च स्तरीय और विस्तृत समीक्षा बैठक की।
इस अहम बैठक में सूखा प्रबंधन, उर्वरकों की उपलब्धता और खाद्यान्नों के भंडारण की वर्तमान स्थिति का गहनता से आकलन किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को एल नीनो के प्रभावों पर सतत एवं कड़ी निगरानी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी सामने आई कि देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गई है, जिन पर कृषि मंत्रालय की खास नजर है।
वर्तमान स्थिति: इन 262 जिलों में से 52 जिलों में पिछले कुछ दिनों में वर्षा हुई है (जो एक सकारात्मक संकेत है), लेकिन 210 जिले अब भी वर्षा की कमी का सामना कर रहे हैं। इनमें से 8 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक नगण्य या बिल्कुल वर्षा नहीं हुई है।
मानसून का पूर्वानुमान: 2 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है। आगामी 2-3 दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, इस वर्ष समग्र रूप से वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है।
महाराष्ट्र में बारिश होने के बावजूद जलाशयों में घटते जलस्तर और उत्तर गुजरात में बारिश की कमी पर चिंता जताते हुए श्री चौहान ने कहा कि वर्षा में लंबा अंतराल चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले के लिए तैयार किए गए ‘कॉन्टिंजेंसी प्लान’ (आपातकालीन योजना) को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
जल्द ही वर्षा की कमी से अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा होगी।
कृषि ऋण कवरेज और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष बल दिया गया है।
किसानों के लिए राहत की बात यह है कि देश में उर्वरक (Fertilizers) और बीज की कोई कमी नहीं है।
उर्वरक उपलब्धता: अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल से जून 2026 के बीच 176.13 LMT (लाख मीट्रिक टन) की आवश्यकता के विरुद्ध देश में 286.37 LMT उर्वरक मौजूद रहा।
कृषि मंत्री ने इस पर संतोष व्यक्त किया और खासकर जनजातीय क्षेत्रों में इसकी सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बीज और दलहन-तिलहन: राष्ट्रीय बीज निगम के पास पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हैं। इसके अलावा, बैठक में दलहन, तिलहन और कपास मिशन की प्रगति तथा गेहूं-चावल के बफर स्टॉक की भी समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम है, हालांकि भूजल स्थिति स्थिर है।
फसल मौसम निगरानी समूह (CWWG) की साप्ताहिक बैठकों के जरिए सूखे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक का समापन करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 भारतीय कृषि के लिए अत्यंत सफल वर्ष रहा है, और अब चुनौतियों के बावजूद किसान कल्याण की दिशा में सरकार के सतत प्रयास जारी रहेंगे।
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