सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटी।
पश्चिम एशिया संकट: मोदी सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटी, जनता और तेल कंपनियों को राहत
नई दिल्ली, द पॉलिटिक्स अगेन ब्यूरो, संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में जारी भारी संघर्ष और उसके कारण उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने आम जनता और तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है।
वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) घटाने का ऐतिहासिक फैसला किया गया है। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती, डीजल पर शुल्क शून्य
सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी, जो पहले 13 रुपये थी, वह अब घटकर मात्र 3 रुपये रह गई है।
वहीं, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी, जो पहले 10 रुपये थी, उसे अब शून्य (0 रुपये) कर दिया गया है।
सरकारी तेल कंपनियों का घाटा होगा कम
यह कदम मुख्य रूप से कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से जूझ रही सरकारी तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL और IOC) को राहत देने के लिए उठाया गया है।
रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, यदि कच्चे तेल का मूल्य 100-105 डॉलर प्रति बैरल रहता है, तो ईंधन कंपनियों को पेट्रोल पर 11 रुपये और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें 119 डॉलर तक पहुंचने के बावजूद सरकारी कंपनियों ने दाम स्थिर रखे हुए थे।
होर्मुज विवाद और आयात पर संकट
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88% और प्राकृतिक गैस का 50% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है।
ईरान द्वारा इस मार्ग को अवरुद्ध करने से टैंकरों की आवाजाही ठप हुई है। इसके चलते निजी कंपनी ‘नायरा एनर्जी’ ने अपने पंपों पर पेट्रोल 100.71 रुपये और डीजल 91.31 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि सरकारी पंपों पर कीमतें अभी भी स्थिर हैं।
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया फैसले का कारण
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पिछले एक महीने में क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
इसका असर दुनियाभर में दिखा है—दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका में ईंधन 30% से 50% तक महंगा हुआ है, जबकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप में भी भारी वृद्धि हुई है।
सरकार ने खुद झेला वित्तीय दबाव
मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास दो विकल्प थे: या तो अन्य देशों की तरह जनता पर बोझ डाला जाए, या खुद वित्तीय दबाव झेला जाए।
पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अपने कर राजस्व में कटौती करते हुए दूसरा विकल्प चुना। रूस-यूक्रेन संकट के समय से ही सरकार इसी जन-कल्याणकारी नीति पर कायम है।
निर्यात पर टैक्स: घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने की कवायद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर आम नागरिकों पर नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा, देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क भी लगाया है।
क्या होता है उत्पाद शुल्क (Excise Duty)?
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक टैक्स है। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्व इकट्ठा करना होता है, जिसका उपयोग देश के विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण, रक्षा बजट और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।












