सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सार्वजनिक जगहों से हटाएं आवारा कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: सार्वजनिक स्थानों से हटाए जाएं आवारा कुत्ते, खतरनाक और पागल कुत्तों को ‘इच्छामृत्यु’ देने की छूट”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और लगातार सामने आ रहे दर्दनाक हादसों पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने उस महत्वपूर्ण निर्देश को बरकरार रखा है, जिसमें सार्वजनिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया गया था।
कई याचिकाओं के बावजूद न्यायालय ने अपने फैसले में कोई भी बदलाव या संशोधन करने से साफ इनकार कर दिया है।
न्यायालय ने स्पष्ट फैसला सुनाया है कि यदि आवश्यक हो, तो राज्य और प्रशासन को रेबीज से ग्रसित, खतरनाक और लाइलाज आवारा कुत्तों को ‘इच्छामृत्यु’ (Euthanasia) देने में संकोच नहीं करना चाहिए।
‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ का सिद्धांत लागू नहीं होने देंगे: सुप्रीम कोर्ट
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई।
पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका सार्वजनिक स्थानों पर कमजोर वर्गों द्वारा सामना की जाने वाली कठोर वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
न्यायालय ने कहा,
“ऐसा प्रतीत होता है कि डार्विन का ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ (Survival of the Fittest) का सिद्धांत यहां लागू हो रहा है। छोटे बच्चों को कुत्तों ने नोंच डाला है, वरिष्ठ नागरिकों पर हमले हुए हैं। सरकारी कार्रवाई के अभाव में बच्चों और बुजुर्गों को अपने अस्तित्व के लिए अकेले नहीं छोड़ा जा सकता।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान ऐसे समाज की कल्पना बिल्कुल नहीं करता, जहां बच्चे और बुजुर्ग लोग सिर्फ अपनी ‘शारीरिक शक्ति’ के भरोसे जीवित रहें। लोगों के जीवन और सुरक्षा की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।
खतरनाक और पागल कुत्तों पर एक्शन की छूट
आदेश सुनाते हुए न्यायालय ने कहा कि पागल, असाध्य रोगग्रस्त या स्पष्ट रूप से आक्रामक कुत्तों के मामलों में, मानव जीवन को होने वाले खतरे को रोकने के लिए इच्छामृत्यु सहित सभी कानूनी रूप से अनुमत उपाय तत्काल किए जाएं। न्यायालय ने कहा कि राज्य इन मामलों में मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता।
डरा रहे हैं कुत्तों के काटने के आंकड़े
अदालत के समक्ष पेश किए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को बयां करते हैं:
तमिलनाडु: इस साल अब तक 2,40,000 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें केवल मार्च महीने में 71,000 मामले और 34 दर्दनाक मौतें शामिल हैं।
राजस्थान: श्री गंगानगर में महज तीन महीनों में 1,483 मामले दर्ज किए गए, जबकि उदयपुर में साल 2026 में 1,700 से अधिक मामले दर्ज हुए।
IGI एयरपोर्ट पर खतरा: आवारा कुत्तों का यह खतरा देश के सबसे संवेदनशील स्थानों में से एक, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) तक पहुंच गया है।
यहां टर्मिनलों और रनवे पर भी आवारा कुत्ते पाए गए हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा में एक बड़ी विफलता को उजागर करता है।
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