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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धर्म परिवर्तन पर छिनेगा SC का दर्जा

सुप्रीम कोर्ट ब्रेकिंग: धर्म परिवर्तन करने पर छिन जाएगा अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा… सर्वोच्च अदालत का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का आदेश रखा बरकरार… कोर्ट ने कहा- ईसाई धर्म अपनाने वाले को नहीं माना जा सकता SC… केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों को ही मिलेगा SC का लाभ… पढ़ें ‘The Politics Again’ की विस्तृत रिपोर्ट…


सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: धर्म परिवर्तन करने पर खत्म हो जाएगा अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा; केवल हिंदू, सिख और बौद्ध को ही लाभ

नई दिल्ली | नेशनल एंड लीगल डेस्क,संतोष सेठ की रिपोर्ट,  The Politics Again

देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने मंगलवार को धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) और आरक्षण के मुद्दे पर एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करता है, तो वह अनुसूचित जाति (SC) का अपना दर्जा और उससे मिलने वाले लाभ पूरी तरह से खो देता है।

इस फैसले के साथ ही शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें धर्मांतरण के बाद SC का दर्जा खत्म होने की बात कही गई थी।

ईसाई या इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा SC का लाभ

इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी और संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया।

  • अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि, “अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और पूरी तरह से ईसाई धर्म के नियमों और मान्यताओं के अनुसार जीवन जी रहा है, तो उसे अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति नहीं माना जा सकता।”

  • इसका सीधा अर्थ है कि अनुसूचित जाति का कोई भी व्यक्ति यदि ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाता है, तो उसे मिलने वाले आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभ स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

किन धर्मों को मानने वालों को मिलेगा SC का दर्जा?

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का हवाला देते हुए स्थिति को पूरी तरह से साफ कर दिया है।

  • अदालत ने अपने फैसले में कहा कि, “हिंदू धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता है।” * गौरतलब है कि मूल रूप से यह लाभ केवल हिंदू धर्म के दलितों के लिए था, लेकिन बाद में संसद द्वारा कानून में संशोधन करके इसमें सिख और बौद्ध धर्म अपनाने वाले दलितों को भी शामिल कर लिया गया था।

यह फैसला देश भर में धर्मांतरण और उसके बाद आरक्षण के लाभ उठाने वाले मामलों के लिए एक बड़ी नजीर (Precedent) साबित होगा।

Santosh SETH

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