मोदी कैबिनेट ने 62,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ 5 साल के लिए मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को मंजूरी दी है, जिससे भारत एक ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में और मजबूत होगा।
मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: मोबाइल विनिर्माण के लिए ₹62,500 करोड़ की ‘MPMS’ योजना को मंजूरी, पैदा होंगे 60,000 नए रोजगार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत को दुनिया का ‘ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की दिशा में मोदी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ नई ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) को मंजूरी दे दी है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में मोबाइल उत्पादन को बढ़ावा देना, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और स्वदेशी ब्रांड्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
यह नई योजना हाल ही में 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई पीएलआई-एलएसईएम (PLI-LSEM) योजना की जगह लेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में विकास को नई रफ्तार देगी।
सरकार ने इस योजना को 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) के लिए लागू किया है। इसके तहत देश में मोबाइल विनिर्माण करने वाली कंपनियों को कई तरह के वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives) दिए जाएंगे:
बिक्री पर प्रोत्साहन: मोबाइल फोन के विनिर्माण पर पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% तक की अलग-अलग दरों से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
घरेलू सोर्सिंग पर एक्स्ट्रा फायदा: प्रमुख पार्ट्स या सब-असेंबली भारत से ही (घरेलू सोर्सिंग) खरीदने पर 1.5 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
स्वदेशी ब्रांड्स और R&D पर फोकस: भारतीय ब्रांड बनाने, प्रोडक्ट डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में पेटेंट हासिल करने के लिए पात्र बिक्री पर 3% का अतिरिक्त इन्सेंटिव दिया जाएगा।
इस महात्वाकांक्षी योजना से देश की अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार पर व्यापक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:
39 लाख करोड़ का उत्पादन लक्ष्य: योजना की 5 साल की अवधि के दौरान, देश में मोबाइल फोन का कुल उत्पादन लगभग 39,00,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
बंपर रोजगार: इस योजना से सीधे तौर पर लगभग 60,000 नए रोजगार (Direct Jobs) सृजित होंगे, जिसका बड़ा फायदा गांवों और छोटे शहरों के युवाओं (विशेषकर महिलाओं) को मिलेगा।
आपको बता दें कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण 7 गुना और निर्यात 11 गुना बढ़ चुका है।
आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता देश है। देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब स्वदेशी रूप से भारत में ही बन रहे हैं।
वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाले सबसे बड़े उत्पाद वर्ग के रूप में उभरे हैं। स्मार्टफोन्स ने डीजल ईंधन और तराशे गए हीरों जैसे पारंपरिक बड़े निर्यात उत्पादों को भी पीछे छोड़ दिया है।
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