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बंगाल: फलता में TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने वापस लिया नामांकन

बंगाल: फलता में 21 मई को पुनर्मतदान से पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने वापस लिया नामांकन, हाईकोर्ट से मिली है अंतरिम राहत”

कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फलता (Falta) विधानसभा सीट पर 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान (Re-polling) से ठीक पहले एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है।

टीएमसी (TMC) उम्मीदवार जहांगीर खान ने मंगलवार को अचानक इस सीट से अपना नामांकन वापस ले लिया है। इस कदम ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

इससे एक दिन पहले, सोमवार (18 मई) को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जहांगीर खान को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ लंबित एफआईआर में 26 मई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

21 मई को क्यों हो रहा है फलता में पुनर्मतदान?

चुनाव आयोग (Election Commission) ने फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को पुनर्मतदान कराने का सख्त आदेश दिया है।

  • क्या था कारण? विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 29 अप्रैल को फलता में मतदान हुआ था। लेकिन, इस दौरान “गंभीर चुनावी अपराधों, व्यापक धांधली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन” की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल के चुनाव को रद्द कर दिया था।

  • आयोग ने स्पष्ट किया है कि 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक सभी बूथों पर कड़ी सुरक्षा के बीच स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित किया जाएगा। इस चुनाव के नतीजे 24 मई को घोषित होंगे।

जहांगीर खान को कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली राहत

नामांकन वापस लेने से एक दिन पहले, सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहांगीर खान द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की।

इस याचिका में खान ने अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR सार्वजनिक करने और दमनकारी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की थी।

  • वकील की दलील: पूर्व महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत में दलील दी थी कि बदले हुए राजनीतिक हालात में चुनाव लड़ रहे जहांगीर खान को कई आपराधिक मामलों में जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

  • कोर्ट का आदेश: अदालत ने राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलाव को प्रथम दृष्टया ध्यान में रखते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया और पुलिस को निर्देश दिया कि 26 मई तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक (Coercive) कार्रवाई न की जाए।

बदला है बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई है और सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली है।

नई सरकार के गठन के बाद से ही टीएमसी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसने का डर बना हुआ है, जिसे जहांगीर खान के इस कदम और अदालत की टिप्पणियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

Santosh SETH

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