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बंगाल चुनाव 2026: अमित शाह ने फूंका चुनावी बिगुल, ‘दो-तिहाई बहुमत’ के लक्ष्य के साथ भाजपा की नई रणनीति तैयार

“पश्चिम बंगाल में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। दिल्ली और बिहार की सफलताओं से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब अपना पूरा ध्यान बंगाल पर केंद्रित कर दिया है”

कोलकाता 31 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय बंगाल दौरा महज एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर, राज्य में ‘सत्ता परिवर्तन’ के लिए तैयार किए गए एक ब्लूप्रिंट का हिस्सा माना जा रहा है।

दो-तिहाई बहुमत का दावा और ‘मिशन बंगाल’

अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि भाजपा इस बार केवल मुकाबले के लिए नहीं, बल्कि निर्णायक जीत के लिए मैदान में उतर रही है। उन्होंने आगामी चुनाव में दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा किया। पार्टी का मानना है कि टीएमसी के लंबे शासन के बाद उपजा ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ (सत्ता विरोधी) माहौल भाजपा के लिए बड़ा अवसर है।

इन तीन मुद्दों पर केंद्रित रहेगा चुनाव

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह ने उन प्रमुख मुद्दों को रेखांकित किया, जिन्हें भाजपा चुनावी हथियार बनाएगी:

  1. घुसपैठ: बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को फिर से प्रमुखता दी जा रही है।

  2. भ्रष्टाचार: प्रशासनिक भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी।

  3. महिला सुरक्षा: राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को भाजपा बड़ा मुद्दा बनाएगी।

संगठनात्मक ढांचा: बूथ स्तर पर घेराबंदी

सूत्रों के अनुसार, शाह ने प्रदेश नेतृत्व और कोर कमेटी के साथ बैठक में ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ का मंत्र दिया है।

  • उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां पिछले चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन कमजोर था।

  • स्थानीय नेताओं की भूमिका बढ़ाई जाएगी और कार्यकर्ताओं को सीधे जनता से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

  • आरएसएस के साथ समन्वय: अमित शाह का आरएसएस कार्यालय का दौरा बंगाल की सामाजिक स्थिति और हिंदू पहचान के मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

मतुआ समुदाय और हिंदुत्व का एजेंडा

मतुआ समुदाय की नाराजगी की खबरों पर विराम लगाते हुए शाह ने स्पष्ट किया कि सीएए (CAA) को लेकर समुदाय भाजपा के साथ है। आरएसएस पदाधिकारियों के साथ चर्चा में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और अवैध घुसपैठ जैसे विषयों को भी प्राथमिकता दी गई, जो आने वाले समय में ध्रुवीकरण की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

Santosh SETH

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