ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, साथ ही पश्चिम बंगाल सीआईडी की जांच का प्रतीकात्मक चित्र
बंगाल: ममता बनर्जी के घर पहुंची CID, विधायकों के ‘फर्जी हस्ताक्षर’ मामले में घिरे अभिषेक बनर्जी; SIT कर रही जांच “
कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विधायकों और सांसदों की बगावत के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी विधायकों के ‘हस्ताक्षर जालसाजी’ (Signature Forgery) मामले की जांच कर रही राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की एक टीम सोमवार को टीएमसी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पहुंची।
गौरतलब है कि ममता बनर्जी इस समय कोलकाता में नहीं हैं, बल्कि वे ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A) ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली में मौजूद हैं।
अभिषेक बनर्जी से मांगा गया मूल प्रस्ताव
इस हस्ताक्षर जालसाजी मामले की आंच ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी तक पहुंच गई है।
SIT का गठन: राज्य सीआईडी ने इस मामले की गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस के एक उप महानिरीक्षक (DIG) के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
अभिषेक बनर्जी के घर दबिश: पिछले सप्ताह सीआईडी की टीम ने इसी मामले के सिलसिले में अभिषेक बनर्जी के आवास का भी दौरा किया था।
जवाब-तलब: अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए ‘पार्टी के मूल प्रस्ताव’ की प्रति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इसके जवाब में अभिषेक बनर्जी ने अपने कानूनी सलाहकार के माध्यम से एजेंसी को एक औपचारिक पत्र भेजा है।
3 विधायकों का चौंकाने वाला दावा: ‘हमने साइन नहीं किए’
राज्य सीआईडी ने जांच को आगे बढ़ाते हुए टीएमसी के 13 विधायकों के बयान दर्ज किए हैं, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
तीन विधायकों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 6 मई को हुई बैठक की प्रस्ताव पुस्तिका में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
कैनिंग पुरबा (Canning Purba) के विधायक ने तो यहां तक दावा किया है कि वे उस दिन कोलकाता में हुई बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे।
इन बयानों के बाद सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को मूल बैठक प्रस्ताव पुस्तिका के साथ जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा है।
🗓️ कैसे शुरू हुआ विवाद? (घटनाक्रम की टाइमलाइन)
इस पूरे विवाद की जड़ें मई महीने में हुए घटनाक्रम से जुड़ी हैं:
9 मई: अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया कि AITC विधायक दल की बैठक में पार्टी ने पदाधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया है।
18 मई: पश्चिम बंगाल विधानसभा के प्रधान सचिव ने अभिषेक बनर्जी को पत्र लिखकर बैठक का कार्यवृत्त (Minutes), प्रस्ताव और बैठक में उपस्थित विधायकों के हस्ताक्षर प्रस्तुत करने का अनुरोध किया।
20 मई: अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्ताव पुस्तिका की एक प्रति और 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाली उपस्थिति पुस्तिका सौंपी। इसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे।
27 मई (बगावत): टीएमसी के दो विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि 6 मई को विपक्ष के नेता के चयन के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया था।
उनका दावा है कि उन्होंने केवल 19 मई को बैठक के प्रस्ताव पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे।
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