“भारत के ‘फार्मा हब’ कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य दवा नियंत्रक की ताजा जांच में देश भर के 200 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें से अकेले 47 दवाएं हिमाचल प्रदेश के सोलन, सिरमौर और ऊना जिले के उद्योगों में बनी हैं”
शिमला/बद्दी 20 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
इन फेल नमूनों में बुखार, हृदय रोग, मधुमेह (Sugar) और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से जुड़ा मामला है।
दवा नियंत्रक विभाग के अनुसार, नवंबर महीने में की गई सैंपलिंग में हिमाचल की कुल 47 दवाएं फेल हुईं:
सोलन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़): 28 दवाएं
सिरमौर (कालाअंब-पांवटा साहिब): 18 दवाएं
ऊना: 01 दवा
जांच में शामिल कुछ महत्वपूर्ण दवाएं और उनके प्रभाव इस प्रकार हैं:
| दवा का नाम | उपयोग (Indication) | मुख्य कंपनी/इकाई |
| पैरासिटामोल | बुखार और दर्द | शिवानी फार्मास्युटिकल, जीएम लैब |
| मेटफॉर्मिन | शुगर (Diabetes) | प्रीत रेमिडीज |
| रेमिप्रिल | दिल की बीमारी (Blood Pressure) | फॉर्मारूट्स हेल्थकेयर, एथेंस लाइफ साइंस |
| जेंटामाइसिन इंजेक्शन | इंफेक्शन | मार्टिन एंड ब्राउन बॉयोसाइंस |
| टेलमीसार्टन | हाई ब्लड प्रेशर | बनेट कंपनी |
| सेफिक्साइम | एंटीबायोटिक | श्रीरमेत इंडस्ट्रीज, क्योरटेक फार्मा |
जांच में पाया गया कि कई जीवन रक्षक दवाओं की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से कम थी। मुख्य रूप से निम्नलिखित दवाएं फेल हुई हैं:
हृदय और रक्तचाप: रेमीप्रिल (Ramipril), टेलमीसार्टन, क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन।
मधुमेह (Diabetes): मेटफॉर्मिन और ग्लीमेपिराइड।
बुखार और दर्द: पैरासिटामोल, एसिक्लोफेनाक और ट्रामाडोल।
एंटीबायोटिक और अन्य: जेंटामाइसिन इंजेक्शन, सेफिक्साइम, क्लेरिथ्रोमाइसिन और एम्ब्रोक्सोल सिरप।
मिर्गी: सोडियम वैल्प्रोएट।
एथेंस लाइफ साइंस (कालाअंब): इसके सबसे ज्यादा 5 सैंपल फेल हुए (रेमीप्रिल, ग्लीमेपिराइड, मैथाप्रिड, निसोलोन और कैटोरोलेक)।
मार्टिन एंड ब्राउन बॉयोसाइंस (नालागढ़): जेंटामाइसिन सल्फेट इंजेक्शन।
शिवानी फार्मास्युटिकल (बद्दी): पैरासिटामोल।
बनेट कंपनी (मानपुरा): टेलमीसार्टन।
विग्स बॉयोटेक (बद्दी): ग्लीमेपिराइड।
प्रीत रेमिडीज (बद्दी): मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड।
राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने पुष्टि की है कि जिन भी कंपनियों के सैंपल फेल पाए गए हैं, उन्हें तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
“विभागीय नियमों के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। संबंधित कंपनियों को बाजार से अपना पूरा स्टॉक तुरंत वापस (Recall) मंगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कोई मरीज इन दवाओं का सेवन न कर सके।” – डॉ. मनीष कपूर, राज्य दवा नियंत्रक
विशेषज्ञों का कहना है कि गुणवत्ताहीन दवाएं न केवल बीमारी को ठीक करने में विफल रहती हैं, बल्कि शरीर के अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती हैं। यदि आप हाल ही में खरीदी गई इनमें से किसी भी दवा का उपयोग कर रहे हैं, तो तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर या फार्मासिस्ट से संपर्क करें और दवा के बैच नंबर की जांच करवाएं।
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