Government officials appealing to public sector bank employees and union leaders to call off the proposed strike

बैंक हड़ताल: 5 डे वर्किंग की मांग पर सरकार की अपील

बैंक हड़ताल पर सरकार की अपील: पीएलआई योजना ली वापस, ‘5 डे वर्किंग’ की मांग पर 28-30 सितंबर की हड़ताल टालने का आग्रह”

नई दिल्ली: संतोष सेठ की रिपोर्ट : द पॉलिटिक्स अगेन 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में ‘फाइव डे वर्किंग’ (5 दिवसीय कार्य सप्ताह) की मांग को लेकर प्रस्तावित हड़ताल पर केंद्र सरकार ने कड़ा संज्ञान लेते हुए बैंक कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि रचनात्मक बातचीत के जरिए सभी जायज चिंताओं का समाधान निकाला जा रहा है।

कर्मचारी यूनियनों की दो प्रमुख मांगों में से एक—कार्य-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की वापसी—को सरकार ने विस्तृत चर्चा के बाद पहले ही स्थगित कर दिया है।

सरकार का कहना है कि एक प्रमुख मांग पूरी होने और द्विपक्षीय संवाद जारी रहने के बावजूद हड़ताल का रास्ता अपनाना आम जनता और बैंकिंग प्रणाली के हित में नहीं है।

हड़ताल का कार्यक्रम और अर्धवार्षिक क्लोजिंग पर असर

पीएलआई योजना वापस लिए जाने के बाद भी, यूनियनों ने 5 दिवसीय कार्य सप्ताह की अपनी दूसरी मांग को लेकर 11 सितंबर 2026 को एक दिवसीय हड़ताल की थी।

  • प्रस्तावित हड़ताल: अब यूनियनों ने 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय हड़ताल और 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का प्रस्ताव रखा है।

  • 5 दिन ठप रह सकता है कामकाज: सरकार ने चिंता जताई है कि 28 से 30 सितंबर की अवधि बैंकों के अर्धवार्षिक अवकाश (Half-yearly closing) के साथ मेल खाती है।

  • सप्ताहांत (Weekend) की छुट्टियों को मिलाकर यह हड़ताल लगातार 5 दिनों तक बैंकिंग सेवाओं को बाधित कर सकती है, जिससे सरकारी लेनदेन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग में भारी असुविधा होगी।

  • बता दें कि 2015 में ही सरकार ने हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था।

बैंक कर्मचारियों के लिए सरकार द्वारा उठाए गए बड़े कल्याणकारी कदम

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह बैंक कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और हाल के वर्षों में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं:

  • वेतन व भत्तों में वृद्धि: सभी कैडर के लिए नए वेतनमान का निर्धारण किया गया है। आगामी द्विपक्षीय समझौते (नवंबर 2027) के लिए सरकार ने पहली बार समय से काफी पहले ही बातचीत शुरू कर दी है।

  • महिला कर्मचारियों को विशेष अवकाश: महिलाओं के लिए मासिक धर्म (Menstruation), बांझपन के इलाज, दूसरे बच्चे को गोद लेने और मृत शिशु जन्म जैसी संवेदनशील स्थितियों में विशेष अवकाश स्वीकृत किए गए हैं।

  • बंपर भर्तियां: वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक बैंकों ने लगभग 4,82,800 कर्मचारियों की भर्ती की है। पिछले तीन वर्षों में भर्ती दर दोगुनी हो गई है।

  • कल्याण कोष में इजाफा: अगस्त 2024 में कर्मचारी कल्याण कोष (SWF) में 56% की भारी बढ़ोतरी की गई।

  • पेंशन व बीमा: बैंक से इस्तीफा देने वालों को भी पेंशन का विकल्प दिया गया है। 1986 से पहले सेवानिवृत्त हुए लोगों की अनुग्रह राशि बढ़ाई गई है और संशोधित चिकित्सा बीमा पॉलिसी लागू की गई है।

  • प्रशासनिक सुधार: ऑनलाइन और स्वचालित स्थानांतरण नीतियां लागू की गई हैं। सहायक, उप, मुख्य महाप्रबंधक स्तर पर कार्यकारी पदों की संख्या बढ़ाई गई है। दिव्यांग कर्मचारियों का परिवहन भत्ता भी बढ़ाया गया है।

सरकार ने बैंक यूनियनों से अपील की है कि वे हड़ताल के बजाय संवाद का मार्ग अपनाएं। आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एक मजबूत और सुदृढ़ स्थिति में हैं,

और हड़ताल जैसी कार्यबाधा से इस प्रगति और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।