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बद्दी फैक्ट्री ब्लास्ट: 20 लाख के मुआवजे के बाद ऋषभ का अंतिम संस्कार

बद्दी फैक्ट्री ब्लास्ट: 20 लाख रुपये के मुआवजे पर बनी सहमति; पैतृक गांव में हुआ 22 वर्षीय ऋषभ का अंतिम संस्कार, उमड़ी भीड़

बद्दी/मंडी: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में स्थित एक फैक्ट्री में दो दिन पहले हुए दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 22 वर्षीय ऋषभ का उनके पैतृक गांव (पाड़छू, सज्याओपीपलु) में भारी गम और अंसंतोष के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया।

कंप्रेशर की मरम्मत के दौरान हुए जोरदार ब्लास्ट में ऋषभ की मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद मुआवजे को लेकर कंपनी प्रबंधन और परिजनों के बीच भारी गतिरोध देखने को मिला, जिसे मजदूर संगठनों और स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप के बाद सुलझा लिया गया।

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

ऋषभ के अंतिम संस्कार में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग, रिश्तेदार और कंपनी के सहकर्मी शामिल हुए। गांव के इस युवा बेटे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।

उपस्थित लोगों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

अंतिम यात्रा में कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह

  • रणताज़ राणा, रमेश ठाकुर, रत्न चंद

  • भाग सिंह, सोहन सिंह, दुनी चंद, जगदीश चंद्र

  • नानक चंद, धनदेव, विक्की, रोबिन राणा

  • अम्मी चंद और डुमनु राम शनीचरू सहित अन्य स्थानीय लोग।

मुआवजे को लेकर विवाद और धरने की चेतावनी

इस पूरी घटना में कंपनी प्रबंधन का प्रारंभिक रवैया बेहद निराशाजनक रहा। पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ऋषभ की मौत पर परिजनों को केवल 2 से 3 लाख रुपये का मुआवजा देने की बात कर रहा था। इस मामूली मुआवजे को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों में भारी रोष था।

मजदूर संगठनों और नेताओं के दबाव में झुकी कंपनी

परिजनों को न्याय दिलाने के लिए नालागढ़ के स्थानीय विधायक, मज़दूर संगठन (CITU), सरकाघाट एवं धर्मपुर कल्याण सभा और परिवार के लोग लामबंद हो गए।

  • धरने का ऐलान: इन सभी संगठनों और परिजनों ने कंपनी के बाहर डेरा डाल दिया और चेतावनी दी कि यदि उचित मुआवजा नहीं दिया गया, तो सुबह शव को सीधे कंपनी के गेट पर रखकर उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

  • 20 लाख पर बनी सहमति: सीटू (CITU) और अन्य संगठनों के भारी दबाव व धरने की चेतावनी के बाद आखिरकार कंपनी प्रबंधन को झुकना पड़ा। कंपनी ने मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने की स्वीकृति दी।

मुआवजे पर लिखित सहमति बनने के बाद ही ऋषभ के शव को बद्दी से उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

Santosh SETH

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