अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एसआईटी ने लगातार तीसरे दिन दस्तावेजों और सीसीटीवी की पड़ताल की।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT की जांच तेज, खंगाले गए CCTV और दस्तावेज, 16 से पूछताछ “
अयोध्या: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में कथित करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है।
इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन मंदिर परिसर में सघन पड़ताल की।
सुबह 10 बजे से लेकर देर शाम तक चली इस जांच में टीम ने काउंटिंग व्यवस्था, बैंकिंग प्रक्रिया और सीसीटीवी फुटेज समेत हर छोटे-बड़े पहलू की बारीकी से जांच की।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने टिन्नू सहित लगभग 16 लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एसआईटी की टीम ने सबसे पहले काउंटिंग हॉल के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का बारीकी से अवलोकन किया।
बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों से अलग-अलग पूछताछ की गई ताकि चढ़ावे की गिनती, पैकिंग और उसे बैंक में जमा करने की पूरी चेन को समझा जा सके।
जांच अधिकारियों ने वर्ष 2021 से लेकर अब तक के सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इनमें दैनिक जमा राशि के रजिस्टर, बैंक रसीदें, वाउचर, और कर्मचारियों के उपस्थिति व नियुक्ति रजिस्टर शामिल हैं।
एसआईटी ने मुख्य मंदिर और गर्भगृह में रखे गए दानपात्रों का भी भौतिक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह समझने का प्रयास किया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी और अन्य धातुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाता है और उनके हिसाब-किताब की प्रक्रिया क्या है।
गर्भगृह प्रभारी केडी तिवारी और कुछ अन्य पुजारियों से दानपात्रों से राशि निकालकर काउंटिंग हॉल तक पहुंचाने की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूछताछ की गई।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और मंदिर प्रबंधक गोपाल राव सहित अन्य जिम्मेदार लोगों से भी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
सूत्रों की मानें तो टीम ने ट्रस्ट से जुड़े कुछ भूमि खरीद के दस्तावेजों पर भी नजर डाली है। संभावना जताई जा रही है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के अयोध्या लौटने पर उनसे चढ़ावा प्रबंधन को लेकर विस्तृत पूछताछ होगी।
इस पूरी जांच में एक बेहद चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। काउंटिंग व्यवस्था में खुद को ‘लेखा प्रभारी’ (कैश इंचार्ज) बताने वाले महिपाल सिंह की नियुक्ति ही सवालों के घेरे में आ गई है।
वर्ष 2021 से अब तक के दस्तावेजों में महिपाल सिंह की आधिकारिक नियुक्ति का कोई रिकॉर्ड एसआईटी को नहीं मिला है। चढ़ावे के वाउचर या बैंक जमा पर्चियों पर भी उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
एसआईटी अब इस दिशा में भी जांच कर रही है कि जब महिपाल सिंह के पास कोई आधिकारिक जिम्मेदारी या रिकॉर्ड नहीं था, तो उन्होंने नोटों के बंडलों में हेराफेरी और गबन के इतने बड़े आरोप किस आधार पर लगाए। यह पहलू जांच की दिशा को पूरी तरह से बदल सकता है।
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