असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधानसभा में बताया कि राज्य से अब तक 31,789 अवैध विदेशियों को वापस भेजा जा चुका है, जबकि 1.72 लाख की पहचान हुई है।
असम से 31 हजार से ज्यादा अवैध विदेशी किए गए बाहर, विधानसभा में सीएम हिमंत विश्व शर्मा ने पेश किए आंकड़े”
गुवाहाटी : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट
असम में अवैध विदेशियों और घुसपैठियों के मुद्दे पर राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में बड़े आंकड़े पेश किए हैं।
असम सरकार ने बताया कि ‘असम समझौते’ के प्रावधानों के तहत राज्य में अब तक 1.72 लाख से अधिक अवैध विदेशियों की पहचान की गई है, जिनमें से 31,789 लोगों को राज्य से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने असम गण परिषद (AGP) की विधायक दीप्तिमयी चौधरी द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में यह विस्तृत जानकारी दी।
विधानसभा में जानकारी देते हुए सीएम शर्मा ने बताया कि असम में अवैध रूप से रह रहे कुल 1,72,673 विदेशियों की अब तक पहचान की जा चुकी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इनमें से 31,789 अवैध विदेशियों को सफलतापूर्वक असम से वापस भेजने में सफल रही है।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया कि वापस भेजे गए ये लोग मूल रूप से किन देशों के नागरिक थे।
किस तरह भेजे गए वापस? (निर्वासन के आंकड़े)
सीएम शर्मा ने वापस भेजे गए 31,789 लोगों का ब्योरा देते हुए बताया कि इन्हें अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत राज्य से बाहर किया गया है:
470 लोगों को निर्वासित (Deported) किया गया।
29,663 लोगों को सीमा पार वापस भेजा गया।
1,572 लोगों को केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देशों के अनुसार वापस भेजा गया।
84 लोगों को निष्कासित (Expelled) किया गया।
राज्य के गृह विभाग का प्रभार भी संभाल रहे हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि निष्कासन की प्रक्रिया लगातार जारी है।
इसके अलावा वर्तमान में 73,759 अन्य संदिग्ध अवैध विदेशियों के मामले ‘विदेशी (नागरिक) न्यायाधिकरणों’ (Foreigners Tribunals) में लंबित हैं।
पारगमन शिविर (ट्रांजिट कैंप) में भी रखे गए हैं विदेशी: मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में 174 विदेशी नागरिकों को गोलपाड़ा स्थित पारगमन शिविर (Transit Camp) में रखा गया है।
बता दें कि इन पारगमन शिविरों को पहले ‘निरुद्ध केंद्र’ (Detention Centre) कहा जाता था।
असम समझौते के नियमों के अनुसार, 25 मार्च 1971 या उसके बाद असम में आने वाले सभी विदेशियों की पहचान की जानी है।
इसके तहत उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का प्रावधान है और उन्हें निर्वासित करने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाते हैं।
असम में अवैध घुसपैठ का मुद्दा पिछले कई दशकों से राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है।
यह मुख्य रूप से पड़ोसी देश बांग्लादेश से कथित रूप से भारत में आने वाले लोगों से जुड़ा है। राज्य और केंद्र सरकार का लगातार यह मानना है कि इस अवैध प्रवास से असम की जनसांख्यिकी (Demographics), संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर गहरा असर पड़ा है।
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