हिमाचल / मंडी: आपदा पीड़ितों का सहारा बनी ‘आर्ट ऑफ लिविंग’
🤝 आपदा में इंसानियत की मिसाल: ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ ने मंडी में बांटी 20 लाख की राहत सामग्री, ध्यान से दूर किया पीड़ितों का तनाव “
मंडी: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
प्राकृतिक आपदा की विनाशकारी मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश के परिवारों के जख्मों पर मरहम लगाने और उन्हें दोबारा बसाने के लिए गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की विश्वविख्यात संस्था ‘दि आर्ट ऑफ लिविंग’ (The Art of Living) लगातार राहत और पुनर्वास प्रयासों में जुटी हुई है।
इसी कड़ी में संस्था के स्वयंसेवकों ने मंडी जिले की विभिन्न पंचायतों में आपदा प्रभावित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए घरेलू जरूरत का सामान और पुनर्वास सामग्री वितरित की।
संस्था के इस जमीनी सेवा कार्य की प्रशासनिक स्तर पर भी जमकर सराहना की जा रही है।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं कि किस तरह यह संस्था आपदा पीड़ितों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है:
🏠 बेघर हुए परिवारों को मिला नया आशियाना सजाने का सामान
संस्था के स्वयंसेवकों ने मंडी जिले के अति दुर्गम और प्रभावित क्षेत्रों— थुनाग, सुराह, शरण, जुड़, लांब, लंबाथाच, कुथाह, पांडवशिला, छतरी और सरोआ (चच्योट) आदि पंचायतों में सक्रियता से राहत सामग्री पहुंचाई।
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25 सबसे प्रभावित परिवारों को विशेष मदद: इस दौरान विशेष रूप से उन 25 परिवारों को पुनर्वास सामग्री प्रदान की गई, जिनके घर इस भीषण त्रासदी में पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं।
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ये परिवार वर्तमान में किराए के मकानों, तहसील परिसरों या अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण लिए हुए हैं।
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राहत सामग्री में क्या था शामिल? प्रभावित परिवारों को अपना घर दोबारा बसाने के लिए डबल दीवान बेड, अलमारी, कुर्सियां, टेबल, गद्दे और तकिये आदि जरूरी सामान मुहैया कराया गया। इस निस्वार्थ सहयोग के लिए पीड़ित परिवारों ने संस्था का भावपूर्ण आभार जताया है।
📦 275 परिवारों तक पहुंची 20 लाख की मदद
संस्था द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 9 जुलाई से शुरू हुए इस विशेष आपातकालीन राहत अभियान के तहत अब तक जिला मंडी और कुल्लू में व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है।
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दोनों जिलों में अब तक लगभग 20 लाख रुपये मूल्य की राहत व पुनर्वास सामग्री वितरित की जा चुकी है।
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इस अभियान के तहत कुल 275 परिवारों को उनकी जरूरत का सामान मुहैया कराया गया है।
🧘♀️ सामग्री ही नहीं, मानसिक आघात और तनाव को भी किया दूर
आपदा के समय केवल भौतिक नुकसान नहीं होता, बल्कि लोग गहरे मानसिक सदमे और डर का भी शिकार होते हैं। ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ ने इस दिशा में एक अनूठी और बेहद जरूरी पहल की:
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साध्वी अमृता का जमीनी नेतृत्व: इन प्रयासों का नेतृत्व कर रही संस्था की साध्वी अमृता ने स्थानीय स्तर पर तहसील थुनाग और चच्योट में लगातार तीन महीने (9 जुलाई से अक्टूबर तक) खुद डेरा डाले रखा।
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पैदल नापे दुर्गम रास्ते: उन्होंने स्वयंसेवकों के साथ मिलकर 30 से अधिक दुर्गम गांवों तक कई किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा की और सीधे पीड़ितों से मुलाकात कर उनका दुख-दर्द साझा किया।
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1000 से अधिक लोगों ने किया ध्यान: राहत शिविरों, फायर ब्रिगेड कार्यालयों, SDRF कैंपों, प्रभावितों के घरों और स्थानीय स्कूलों में विशेष ‘ध्यान शिविर’ (Meditation Camps) आयोजित किए गए।
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अकेले थुनाग और चच्योट क्षेत्र में 1000 से अधिक लोग इन शिविरों के माध्यम से ध्यान कर अपने मानसिक तनाव और डर से मुक्ति पा चुके हैं।
यह मानवीय पहल इस बात का प्रमाण है कि जब समाज और संस्थाएं मिलकर खड़ी होती हैं, तो किसी भी बड़ी से बड़ी प्राकृतिक आपदा के घावों को भरा जा सकता है।
नोट: देशभर की राजनीति, सामाजिक सरोकार की ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।











