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पाकिस्तान : NATO जैसे रक्षा समझौते से सेना प्रमुख मुनीर ने झाड़ा पल्ला

सऊदी अरब को पाकिस्तान का धोखा? ‘NATO’ जैसे रक्षा समझौते से मुनीर ने झाड़ा पल्ला, कहा- ‘हम तालिबान से निपटने में व्यस्त हैं ‘

इस्लामाबाद/रियाद: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए बहुचर्चित ‘सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते’ (SMDA) की असलियत अब दुनिया के सामने आने लगी है।

मध्य पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच भड़के युद्ध की आंच जब सऊदी अरब तक पहुंची, तो ‘सुरक्षा कवच’ का वादा करने वाला पाकिस्तान अब अपने कदम पीछे खींचता नजर आ रहा है।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने सऊदी अरब को मदद भेजने से बचने के लिए अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ उलझने का बहाना बनाया है।

क्या था पाकिस्तान-सऊदी का ‘NATO’ जैसा समझौता?

ऑपरेशन सिंदूर के 132 दिन बाद, 17 सितंबर 2025 को पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

नाटो (NATO) के ‘आर्टिकल 5’ की तर्ज पर हुए इस समझौते का मूल सार यह था कि “एक देश पर हमला, दोनों पर हमला माना जाएगा।”

माना जा रहा था कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों और विशाल सेना का इस्तेमाल सऊदी अरब (विशेषकर मक्का और मदीना) की रक्षा के लिए करेगा। इसके बदले में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर के कर्ज से राहत दी थी।

ईरान के हमलों से घबराया पाकिस्तान

स्थिति तब बिगड़ गई जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस (जहां अमेरिकी सैन्य अड्डा है), रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास और तेल क्षेत्रों पर हमले शुरू कर दिए।

समझौते के तहत सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने पाकिस्तान से सैन्य और सामरिक मदद की उम्मीद की।

लेकिन, शिया बहुल ईरान से सीधे युद्ध मोल लेने के डर से इस्लामाबाद और रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय) ने चुप्पी साध ली।

तालिबान का बहाना और मुनीर की चाल

दक्षिण एशिया मामलों की विशेषज्ञ इतालवी पत्रकार फ्रांसेस्का मारिनो के अनुसार, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मोहम्मद बिन सलमान को संदेश भिजवाया है कि पाकिस्तानी सेनाएं अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ भारी व्यस्तता से जूझ रही हैं।

इसलिए, उनके पास सऊदी अरब को संसाधन भेजने का समय नहीं है। सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान जानबूझकर अफगान सीमा को अशांत कर रहा है, ताकि उसे अपनी सेनाएं मध्य पूर्व न भेजनी पड़ें।

एमबीएस (MBS) की बढ़ी नाराजगी

पाकिस्तान के इस गोल-मोल रवैये से सऊदी क्राउन प्रिंस एमबीएस बेहद नाराज हैं। जर्मनी में अफगानिस्तान के पूर्व राजदूत हमाद सिदिग के मुताबिक, एमबीएस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को कई बार तलब किया है और समझौते का पालन न करने पर कड़ी निराशा व्यक्त की है।

12 मार्च को जेद्दा में हुई मुलाकात में भी पाकिस्तान ने “पूर्ण एकजुटता” का मौखिक आश्वासन तो दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सैन्य तैनाती नहीं की।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान ने यह साबित कर दिया है कि वह सऊदी अरब के पैसों पर तो पल सकता है, लेकिन उसके लिए अपनी सेना की बलि नहीं चढ़ा सकता।

Santosh SETH

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