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अमित शाह का ऐलान: नॉर्थ-ईस्ट से हटेगा AFSPA, ऐतिहासिक समझौता

🕊️ अमित शाह का बड़ा ऐलान: अगले साल तक नॉर्थ-ईस्ट से लगभग खत्म होगा ‘AFSPA’, असम-नागालैंड के बीच ऐतिहासिक समझौता “

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

पूर्वोत्तर भारत (North-East) में शांति और विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक अहम घोषणा की है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगले साल तक, एक या दो राज्यों को छोड़कर, पूरे नॉर्थ-ईस्ट इलाके को आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) के दायरे से पूरी तरह बाहर किया जा सकता है।

यह बड़ा बयान असम-नागालैंड बॉर्डर पर तेल और खनिजों की खोज के लिए केंद्र, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच हुए एक ऐतिहासिक तीन-पक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर के दौरान सामने आया।

‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से समझते हैं इस समझौते के मायने और नॉर्थ-ईस्ट के बदलते हालात:

🤝 असम-नागालैंड और केंद्र के बीच ऐतिहासिक MoU

दशकों से अटके पड़े सीमा विवादों को सुलझाते हुए एक नई शुरुआत की गई है।

  • 30 साल पुराना विवाद सुलझा: असम-नागालैंड बॉर्डर पर स्थित विवादित इलाके (Disputed Area Belt – DAB) में तेल और खनिजों की खोज का काम अधिकार क्षेत्र के मुद्दों के कारण पिछले तीन दशकों से अधिक समय से रुका हुआ था।

  • ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना: अमित शाह ने इस समझौते की सराहना करते हुए कहा कि आज पूरा उत्तर-पूर्व ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और यह समझौता क्षेत्र की प्रगति के लिए एक नई राह खोलेगा।

📉 80% घटी हिंसक घटनाएं, सिकुड़ रहा AFSPA का दायरा

केंद्रीय गृह मंत्री ने पूर्वोत्तर में शांति बहाली के लिए मोदी सरकार के प्रयासों का आंकड़ा भी देश के सामने रखा:

  • शांति समझौते: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2019 से अब तक नॉर्थ-ईस्ट में लगभग एक दर्जन बड़े शांति समझौते (Peace Accords) हुए हैं।

  • हिंसा में भारी कमी: इन समझौतों के परिणामस्वरूप क्षेत्र में हिंसक घटनाओं में 80 फीसदी की भारी कमी आई है।

  • AFSPA से राहत: हिंसा कम होने का सीधा असर यह हुआ है कि AFSPA के दायरे में आने वाला कुल इलाका भी 80 फीसदी तक कम हो गया है, जो स्थानीय नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है।

🛢️ ऊर्जा संकट का समाधान और अरबों का आर्थिक लाभ

यह तीन-पक्षीय समझौता केवल शांति के लिए नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी एक ‘गेम चेंजर’ साबित होने वाला है।

  • क्षमता में 10 गुना वृद्धि: गृह मंत्री ने बताया कि सिर्फ इस एक MoU से रोजाना 1000-1500 बैरल तेल निकालने की क्षमता को 10 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।

  • 15,000 करोड़ का खजाना: अकेले इस क्षेत्र से 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का तेल निकालने की अपार संभावना है।

  • विदेशी निर्भरता होगी कम: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट का सामना कर रही है।

  • ऐसे में नगालैंड और असम में फैले तेल के भंडार को निकालने से दूसरे देशों पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नॉर्थ-ईस्ट अब केवल विवादों का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का एक मजबूत और आत्मनिर्भर इंजन बन रहा है।

नोट: देशभर की राजनीति, नीतिगत फैसलों और बड़ी राष्ट्रीय खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।

Santosh SETH

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