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अमेरिका का मिसाइल संकट: Lockheed Martin ने मांगी भारत से मदद

” अमेरिका का ‘अनलिमिटेड मिसाइल’ का दावा हुआ हवा! उत्पादन संकट में फंसी Lockheed Martin ने मांगी भारत से मदद, ट्रंप की एक धमकी पड़ी भारी “

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

जिस अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले ही दुनिया के सामने अपनी “अनलिमिटेड मिसाइलों” (असीमित मिसाइलों) का दंभ भरा था, आज वही सुपरपावर एक ऐसे गहरे संकट में फंस गया है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

मिडिल ईस्ट के तनाव और उत्पादन में देरी के चलते अमेरिका की मशहूर पेट्रियट (Patriot) इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि इस गंभीर संकट से उबरने के लिए अब अमेरिका की नजरें भारत की ओर उठ गई हैं।

लॉकिड मार्टिन का भारत की कंपनियों से संपर्क

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी दिग्गज रक्षा कंपनी लॉकिड मार्टिन (Lockheed Martin) इस समय भारी उत्पादन संकट से जूझ रही है।

अपनी सप्लाई चेन को टूटने से बचाने के लिए लॉकिड मार्टिन ने भारत की दो प्रमुख डिफेंस कंपनियों—’टाटा एडवांस सिस्टम्स’ (Tata Advanced Systems) और ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ (BEL) से संपर्क साधा है।

  • मिसाइल निर्माण में सबसे अहम हिस्सा ‘एयर फ्रेम’ (Airframe) का होता है, जिसे बनाने में भारतीय कंपनियां बेहद मजबूत मानी जाती हैं।

  • एयर फ्रेम तैयार होने के बाद ही उसमें सेंसर और विस्फोटक लगाए जाते हैं। इसके लिए भारी मात्रा में एलॉयज और कंपोजिट मटेरियल की जरूरत है, जिसकी आपूर्ति अब भारत से करने की योजना है।

क्या है अमेरिका का मिसाइल संकट?

सितंबर 2025 में अमेरिकी सेना ने लॉकिड मार्टिन के साथ 9.8 बिलियन डॉलर का एक विशाल समझौता किया था।

इसके तहत सेना को 1970 ‘पैक थ्री’ (PAC-3) इंटरसेप्टर मिसाइलें मिलनी थीं। इनका काम दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करना होता है। लेकिन अब तक इनकी पूरी डिलीवरी नहीं हो पाई है।

UAE का खत्म होता स्टॉक और ईरान की सस्ती रणनीति

इसी बीच मिडिल ईस्ट में ईरान की बढ़ती मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की नींद उड़ा दी है।

  • UAE की मजबूरी: हालिया तनाव में यूएई (UAE) ने अपनी 6 पेट्रियट बैटरियों को एक्टिव कर 390 से ज्यादा PAC-3 मिसाइलें दाग दी हैं। स्टॉक खत्म होने के डर से अब यूएई को साउथ कोरिया के इंटरसेप्टर सिस्टम का सहारा लेना पड़ रहा है।

  • महंगी मिसाइल vs सस्ते ड्रोन: ईरान बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन और मिसाइलें बना रहा है। वहीं, अमेरिका की एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है।

  • अगर आसमान में सस्ते ड्रोन्स की बाढ़ आ जाए, तो उन्हें रोकना अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से बेहद महंगा और चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

ट्रंप की स्पेन को धमकी, अमेरिका को ही पड़ी भारी

इस संकट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक कूटनीतिक चूक भी है। हाल ही में ट्रंप ने स्पेन को नाटो (NATO) से बाहर निकालने और उसके साथ व्यापार बंद करने की धमकी दी थी।

ट्रंप शायद यह भूल गए थे कि अमेरिकी मिसाइल उद्योग की सप्लाई चेन में स्पेन और यूरोप के कई अन्य देशों का भी अहम योगदान है।

यूरोप से सप्लाई प्रभावित होने के कारण ही अब अमेरिका को उत्पादन तेज करने के लिए भारत की ओर दौड़ लगानी पड़ी है।

Santosh SETH

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