US ने तारपीडो से डुबाया ईरानी वॉरशिप 'IRIS Dena', 180 सैनिक थे सवार | The Politics Again
“अमेरिका का ऐतिहासिक हमला: ‘मिलान 2026’ से लौट रहे ईरानी वॉरशिप ‘IRIS Dena’ को तारपीडो से डुबाया, इंडियन ओशन में मची खलबली “
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
इंडियन ओशन (हिंद महासागर) में एक ऐसी घटना घटी है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी नेवी सबमरीन ने ईरान के वॉरशिप ‘IRIS Dena’ पर तारपीडो से जानलेवा हमला कर दिया।
हमले के चंद मिनटों के भीतर ही यह विशालकाय युद्धपोत समंदर में डूब गया। यह घटना न सिर्फ एक नेवल क्लैश (Naval Clash) है, बल्कि मध्य पूर्व (Middle East) के युद्ध का समंदर तक फैलता हुआ एक बेहद खतरनाक विस्तार है।
‘मिलान 2026’ अभ्यास से लौट रहा था जहाज
यह घटना भारत के नजरिए से भी संवेदनशील है क्योंकि ईरानी वॉरशिप IRIS Dena भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित ‘मिलान 2026’ (MILAN 2026) बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास से वापस ईरान लौट रहा था।
21 से 25 फरवरी तक चले इस 13वें एडिशन में 74 देशों ने हिस्सा लिया था।
इस ऐतिहासिक अभ्यास में 42 वॉरशिप और 29 सैन्य विमान शामिल हुए थे, जिनमें 18 विदेशी युद्धपोत थे। IRIS Dena भी उन्हीं में से एक था।
180 सैनिक थे सवार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली ऐसी घटना
जब IRIS Dena श्रीलंका के पास से गुजर रहा था, तभी अमेरिकी सबमरीन ने उस पर तारपीडो दाग दिया।
ईरान की चेतावनी और भारत की भूमिका पर उठे सवाल
हमले के तुरंत बाद ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
हालांकि, ईरान ने अपने बयान में IRIS Dena को ‘इंडियन नेवी का गेस्ट’ (अतिथि) बताकर भारत का जिक्र भी किया है।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक नियमों (International Maritime Laws) के अनुसार इस मामले में तस्वीर बिल्कुल साफ है:
टेरिटोरियल वाटर्स बनाम हाई सीज़: जब कोई जहाज किसी दूसरे देश के पोर्ट पर होता है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी अतिथि देश की होती है।
लेकिन जैसे ही जहाज ‘हाई सीज़’ (अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र) में निकलता है, उसकी पूरी जिम्मेदारी उसी देश की नौसेना की होती है जिसका वह जहाज है।
भारत की स्थिति: भारत ने विशाखापत्तनम में एक शानदार एक्सरसाइज होस्ट की, लेकिन पूरे इंडियन ओशन में हर देश के जहाज को सुरक्षा देना न तो मुमकिन है और न ही अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत यह भारत की जिम्मेदारी है।
भारत में इस दुखद घटना और सैनिकों की मौत पर स्वाभाविक रूप से चिंता जताई गई है, लेकिन कूटनीतिक और जमीनी हकीकत यही है कि यह अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे पुराने टकराव का नतीजा है।
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