भारत टेक्स 2026 में लखपति दीदियों का कमाल, ग्रामीण हुनर की वैश्विक गूँज
भारत टेक्स 2026 में छाईं ‘लखपति दीदियां’: ग्रामीण भारत के हुनर और उद्यमशीलता ने खींचा सबका ध्यान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
‘भारत टेक्स 2026’ में ग्रामीण विकास मंत्रालय की भागीदारी ने एक नया इतिहास रचा है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत देश के कोने-कोने से आई ‘लखपति दीदियों’ ने अपने उद्यम, पारंपरिक शिल्प और बाजार कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।
यह आयोजन न केवल ग्रामीण महिलाओं की उद्यमिता को मंच देने वाला साबित हुआ, बल्कि भारत की समृद्ध वस्त्र और हस्तशिल्प परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का एक सशक्त माध्यम बना।
क्या रहा आयोजन का मुख्य केंद्र?
चार दिवसीय इस भव्य आयोजन में मंत्रालय के पवेलियन ने ‘लखपति दीदियों’ के लिए एक सेतु का काम किया।
यहाँ ग्रामीण महिला उद्यमियों ने खरीदारों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और वैश्विक आगंतुकों से सीधे संवाद किया।
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विशिष्ट संग्रह: पवेलियन में ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ मुख्य आकर्षण रहा। यह पहल ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) द्वारा निर्मित चुनिंदा हस्तनिर्मित उत्पादों को एक प्रीमियम पहचान दिला रही है।
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कला और कौशल: यहाँ पट्टाचित्र, पेन कलमकारी, फुलकारी कढ़ाई, एरी रेशम और पश्मीना जैसे उत्कृष्ट हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जो ग्रामीण महिलाओं की अपार रचनात्मकता और कौशल का प्रमाण हैं।
महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा
समापन समारोह में वस्त्र मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंत्रालय के पवेलियन का दौरा किया।
उन्होंने ‘लखपति दीदियों’ के उद्यमशीलता सफर को करीब से जाना और उनके उत्पादों की विविधता की सराहना की।
इस भागीदारी का मुख्य उद्देश्य इन महिला उद्यमियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सीधे जोड़ना था, ताकि वे अपनी आय को और अधिक बढ़ा सकें और स्थायी आजीविका सृजित कर सकें।
6 करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य
डीएवाई-एनआरएलएम (DAY-NRLM) के माध्यम से आज पूरे भारत में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए संगठित किया गया है।
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बड़ी उपलब्धि: सरकार ने पहले ही तीन करोड़ लखपति दीदियों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
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नया लक्ष्य: अब सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य देश भर में ‘छह करोड़ लखपति दीदियों’ के सृजन का है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा।
यह आयोजन साबित करता है कि डीएवाई-एनआरएलएम के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं अब केवल उत्पादक नहीं, बल्कि सफल उद्यमी बन रही हैं, जो देश की आर्थिक प्रगति में सीधे तौर पर अपना योगदान दे रही हैं।











