एमएसएमई और डीपीआईआईटी का समझौता, मिलेगी वैश्विक पहचान
एमएसएमई और डीपीआईआईटी के बीच समझौता, ‘भारत जीआई’ बैनर से मिलेगी जीआई उत्पादों को वैश्विक पहचान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश की समृद्ध भौगोलिक संकेत (GI – Geographical Indications) विरासत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते पर एमएसएमई मंत्रालय के निदेशक मोहम्मद सालिक परवेज और डीपीआईआईटी के आईपीआर प्रभाग के निदेशक श्री करण थापर ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
‘भारत जीआई’ बैनर का शुभारंभ
इस साझेदारी का मुख्य आकर्षण ‘भारत जीआई’ बैनर की शुरुआत है। इसके तहत, दोनों विभाग मिलकर क्षेत्रीय जीआई उत्पादों को डिजिटल प्लेटफार्मों जैसे ओएनडीसी (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) तक पहुंचाएंगे।
इससे स्थानीय उत्पादों को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और निर्यात के लिए तैयार किया जा सकेगा।
समझौते के मुख्य बिंदु और लाभ:
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डिजिटल और बाजार पहुंच: पारंपरिक कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों के उत्पादों को ONDC और GeM से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें सीधा और बड़ा बाजार मिलेगा।
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ओडीओपी (ODOP) को बढ़ावा: इस पहल से ‘एक जिला एक उत्पाद’ (One District One Product) पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलेगी।
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वैश्विक प्रदर्शनियां: भारतीय जीआई उत्पादों के विपणन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यापार प्रदर्शनियों और क्रेता-विक्रेता बैठकों में समर्पित ‘जीआई पवेलियन’ स्थापित किए जाएंगे।
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आर्थिक सशक्तिकरण: यह कदम स्वदेशी कारीगरों की आजीविका में सुधार करेगा और उनके व्यापार का गुणवत्ता मानकीकरण करेगा।
यह सहयोगात्मक प्रयास ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को बल देते हुए भारतीय शिल्प और उद्यमशीलता को प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करने का काम करेगा।











