राहुल गांधी पर हाईकोर्ट सख्त: दोहरी नागरिकता केस में FIR का आदेश
राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहरी नागरिकता मामले में दिया FIR का आदेश, सुल्तानपुर कोर्ट में भी हुई सुनवाई
प्रयागराज/सुल्तानपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं।
शुक्रवार को दो अलग-अलग अदालतों से उनसे जुड़ी अहम खबरें सामने आईं। एक ओर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी कथित दोहरी नागरिकता मामले में सख्त रुख अपनाया है।
तो दूसरी ओर सुल्तानपुर की एक विशेष अदालत में मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान वादी पक्ष को कड़ी फटकार लगी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट: दोहरी नागरिकता मामले में FIR के आदेश
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता होने के आरोपों की गहन जांच आवश्यक है।
अदालत ने इस मामले में नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह या तो इस मामले की स्वयं जांच करे या फिर इसे किसी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप दे।
हाईकोर्ट का यह फैसला भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है।
दरअसल, शिशिर ने लखनऊ की विशेष सांसद/विधायक (MP/MLA) अदालत के 28 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें निचली अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।
सुल्तानपुर कोर्ट: मानहानि मामले में वादी को सख्त चेतावनी
उधर, उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की सांसद-विधायक (एमपी-एमएलए) विशेष अदालत में भी शुक्रवार को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे एक मानहानि मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने वादी (शिकायतकर्ता) पक्ष के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।
राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने जानकारी दी कि शुक्रवार को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 311 के तहत दिए गए एक प्रार्थना पत्र पर बहस होनी थी।
हालांकि, वादी पक्ष के वकील ने एक बार फिर स्थगन (समय) की मांग की। अदालत ने स्थगन तो स्वीकार कर लिया, लेकिन एक सख्त आदेश भी जारी किया।
अदालत ने वादी पक्ष को चेतावनी दी है कि वे पिछले कई तारीखों से स्थगन मांग रहे हैं जिससे कार्यवाही बाधित हो रही है।
यदि 22 अप्रैल (अगली सुनवाई की तिथि) को वादी पक्ष बहस के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो उनके खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञात हो कि इससे पहले 28 मार्च की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील संतोष कुमार पांडेय ने अदालत में सीआरपीसी की धारा 311 और 91 के तहत एक अर्जी देकर राहुल गांधी की ‘आवाज का नमूना’ (Voice Sample) लेने का अनुरोध किया था।











