अलविदा ‘दादा’: नम आंखों और राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार पंचतत्व में विलीन
“महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और जनप्रिय नेता अजित पवार गुरुवार को हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गए”
बारामती/पुणे “The Politics Again”
बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान (State Honors) के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
जैसे ही उनके बेटों पार्थ और जय ने चिता को मुखाग्नि दी, वहां मौजूद हजारों समर्थकों का सब्र का बांध टूट गया और पूरा आसमान “अजित दादा अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
आंसुओं का सैलाब और परिवार का दर्द
अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव काटेवाड़ी से शुरू होकर विद्या प्रतिष्ठान पहुंची। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखकर उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार बेसुध सी हो गईं।
उनकी ननद और सांसद सुप्रिया सुले पूरे समय उन्हें संभालती नजर आईं। अजित पवार के चाचा और उनके राजनीतिक गुरु शरद पवार पूरे समय पत्थर की मूरत बने चुपचाप बैठे रहे। उनकी खामोशी ने बयां कर दिया कि उन्होंने आज क्या खो दिया है।
सत्ता और विपक्ष सब एक साथ
दुख की इस घड़ी में राजनीतिक लकीरें मिट गईं। अजित पवार को अंतिम विदाई देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, सीएम एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, गोवा सीएम प्रमोद सावंत समेत विपक्ष के उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी पहुंचे। अभिनेता रितेश देशमुख भी वहां मौजूद थे।
“शांति ही सच्ची श्रद्धांजलि”
अजित पवार अपने सख्त अनुशासन के लिए जाने जाते थे। प्रशासन ने लाउडस्पीकर से अपील की कि “शांति बनाए रखना ही दादा के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।” इस अपील का असर भी दिखा और गमगीन माहौल में सन्नाटा पसरा रहा।
जांच अपडेट: ब्लैक बॉक्स मिला, हादसे की जांच तेज
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ब्लैक बॉक्स बरामद: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दुर्घटनाग्रस्त विमान का ‘ब्लैक बॉक्स’ (FDR और CVR) बरामद कर लिया है। इससे पता चलेगा कि आखिरी पलों में कॉकपिट में क्या बात हुई थी।
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वजह: शुरुआती जांच में ‘खराब विजिबिलिटी’ (Low Visibility) को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस ने आकस्मिक मौत (ADR) का मामला दर्ज किया है।
अजित पवार के साथ इस हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट शाम्भवी पाठक, सुरक्षा अधिकारी विदीप जाधव और केबिन क्रू पिंकी माली के शव भी उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं।
बारामती आज सूना हो गया है, और महाराष्ट्र की राजनीति में जो शून्य आया है, उसे भरना आसान नहीं होगा।











