भक्ति या प्यार : बदायूं की पिंकी शर्मा ने भगवान कृष्ण की मूर्ति से की शादी
“भक्ति और प्यार की अद्भुत और मनोहारी तस्वीर सामने आई है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में एक लड़की ऐसी रम गई कि उसने यशोदानंदन को ही अपना सब कुछ मान लिया और अब अपना पूरा जीवन भगवान की मूर्ति के सहारे बिताएगी”
बदायूं 10 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
बदायूं की पिंकी शर्मा ने वृंदावन मंदिर जाने के तीन महीने बाद भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति से शादी कर ली। महिला तीन महीने पहले मथुरा वृंदावन गई थी। जहां पर प्रसाद के रूप में सोने की अंगूठी मिली थी, जिसे उसने भगवान की तरफ से प्यार की स्वीकृति का संकेत माना। इसके बाद हिंदू रीति-रिवाज के साथ पिंकी ने भगवान कृष्ण की मूर्ति से शादी कर ली।
श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन: बदायूं की पिंकी शर्मा
1. विवाह का निर्णय और स्वीकृति
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घटनास्थल: बदायूं की पिंकी शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति से विवाह किया।
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प्रेरणा स्रोत: तीन महीने पहले पिंकी वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर गई थीं। वहाँ उन्हें प्रसाद के रूप में एक सोने की अंगूठी मिली।
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विश्वास: पिंकी ने इस अंगूठी को भगवान श्रीकृष्ण की ओर से प्यार की स्वीकृति (Acceptance) का संकेत माना, जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन मूर्ति के सहारे बिताने का निर्णय लिया।
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पारिवारिक सहमति: शुरू में परिवार को यह फैसला समझने में मुश्किल हुई। पिंकी के पिता, सुरेश चंद्र शर्मा के अनुसार, पिंकी हमेशा कहती थी कि सब कुछ तभी होगा जब भगवान कृष्ण चाहेंगे। उनके अटूट विश्वास को देखकर परिवार आखिरकार सहमत हो गया और शादी से दस दिन पहले वे मूर्ति को घर लाए।
2. विवाह समारोह
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तारीख और रस्में: पिंकी ने शनिवार को पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज के साथ विवाह की सभी रस्में निभाईं, जिसमें सात फेरे भी शामिल थे। फेरे के समय भगवान कृष्ण की मूर्ति पिंकी की गोद में थी।
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बाराती की भूमिका: पिंकी के जीजा, इंद्रेश शर्मा, ने प्रतीकात्मक रूप से भगवान कृष्ण के लिए बाराती (दूल्हे के पक्ष) की भूमिका निभाई।
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विदाई: किसी भी दुल्हन की तरह, पिंकी की विदाई अगले दिन हुई, जिसमें पूरे गांव ने पिंकी के परिवार की भूमिका निभाई।
3. जीवन का समर्पण और परिणाम
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आगामी जीवन: पिंकी की एकमात्र इच्छा अब वृंदावन में रहने की है, जहाँ वह अपना जीवन पूजा, ध्यान और आध्यात्मिक सेवा में समर्पित करना चाहती हैं।
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आजीविका का विश्वास: पिंकी ने कहा कि उन्हें खर्च या आजीविका की चिंता नहीं है, क्योंकि उन्हें पूरा विश्वास है कि भगवान कृष्ण सब कुछ संभाल लेंगे।
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वर्तमान निवास: विवाह के बाद पिंकी अब अपने जीजा के घर में रह रही हैं, जिसे प्रतीकात्मक रूप से कृष्ण का परिवार माना जा रहा है।
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नई पहचान: गांव के लोगों ने पिंकी के इस गहरे समर्पण के कारण उन्हें प्यार से “मीरा” कहना शुरू कर दिया है, उनकी तुलना भक्त संत मीरा बाई से की जा रही है।
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व्यक्तिगत बदलाव: पिंकी के अनुसार, इस समारोह के बाद से उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है और वह पूरी तरह से भक्ति के रास्ते पर लग गई हैं।
पिंकी शर्मा की यह कहानी आधुनिक समय में आध्यात्मिक प्रेम और भक्ति की शक्ति को दर्शाती है।











