वंदे मातरम बोलने पर इंदिरा जी ने डाल दिया था जेल – अमित शाह
“केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में वंदे मातरम पर बहस के दौरान मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी पर राष्ट्रगीत को महत्व न देने और उसकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया”
नई दिल्ली 09 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
अमित शाह ने राज्यसभा में वंदे मातरम पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में राष्ट्रगीत बोलने वालों को जेल भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति ने देश के विभाजन में योगदान दिया।
शाह के अनुसार, नेहरू ने गीत को विभाजित किया और आपातकाल में वंदे मातरम बोलने पर प्रतिबंध लगाया गया, जिससे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को ठेस पहुंची।उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण गीत को उचित सम्मान नहीं मिला और यह उपेक्षा इंदिरा गांधी के शासनकाल के आपातकाल तक जारी रही।
🗣️ अमित शाह के प्रमुख आरोप और तर्क
डॉ. अमित शाह ने वंदे मातरम के संबंध में कांग्रेस की नीतियों की आलोचना करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए:
1. पिछली वर्षगाँठों पर उपेक्षा
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शाह ने कहा कि भारत किसी भी महान रचना की उपलब्धि का जश्न मनाता है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व के कारण पिछली वर्षगाँठों पर वंदे मातरम को उचित मान्यता नहीं मिली।
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स्वर्ण जयंती (50 वर्ष): जब यह 50 साल का हुआ, देश आज़ाद नहीं हुआ था।
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अगली वर्षगाँठ (स्वर्ण जयंती): जब इसकी स्वर्ण जयंती आई, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे दो भागों में विभाजित कर दिया (अर्थात पूरे गीत को नहीं अपनाया गया)।
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शताब्दी (100 वर्ष): जब यह 100 साल का हुआ, तब आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने वंदे मातरम बोलने वालों को जेल में डाल दिया था और अखबारों पर सेंसरशिप लगा दी गई थी।
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2. तुष्टीकरण की राजनीति और देश विभाजन
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शाह ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और यहाँ तक कहा कि “अगर कांग्रेस ने अपनी तुष्टिकरण की नीति के तहत वंदे मातरम का विभाजन नहीं किया होता, तो देश का विभाजन नहीं होता और आज देश अखंड होता।”
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उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नेहरू द्वारा गीत को दो छंदों तक सीमित करने के फैसले ने ही राजनीतिक तुष्टीकरण की शुरुआत की।
3. वंदे मातरम का बहिष्कार
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शाह ने आरोप लगाया कि कई भारतीय ब्लॉक नेताओं ने ऐतिहासिक रूप से वंदे मातरम गाने से इनकार किया है।
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उन्होंने हाल के उदाहरणों का हवाला दिया जब गीत गाए जाने पर सदस्य लोकसभा से बहिर्गमन कर गए थे, और कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ के कई लोगों ने इसे गाने से इनकार किया था।
4. भाजपा द्वारा परंपरा का पुनरुद्धार
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शाह ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए भाजपा के प्रयासों को याद किया और कहा कि पार्टी ने संसद में राष्ट्रगीत गायन की परंपरा को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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उन्होंने बताया कि $\text{1992}$ में, भाजपा सांसद राम नाइक ने इस मुद्दे को उठाया था और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के आग्रह पर लोकसभा ने सर्वसम्मति से इस प्रथा को बहाल कर दिया था।
5. भविष्य का नारा
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शाह ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा कि वंदे मातरम जो कभी आज़ादी का नारा था, वह अब अमृत काल में विकसित भारत के निर्माण का नारा बनेगा।
यह चर्चा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की विरासत और 150 वर्षों के स्मरणोत्सव पर विशेष संसदीय ध्यान का हिस्सा थी।











