उर्वरक आपूर्ति में बड़ी कूटनीतिक सफलता: हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचे 4 जहाज, खरीफ सीजन के लिए बंपर स्टॉक तैयार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
ग्लोबल ट्रेड और मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
भारत आ रहे यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर से लदे चार बड़े मालवाहक जहाजों ने सफलतापूर्वक ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को पार कर लिया है।
यह खेप मौजूदा खरीफ सीजन में खेती की जरूरतों को पूरा करने और देश के बफर स्टॉक को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, फारस की खाड़ी से निकले ये जहाज अब अपने तय भारतीय गंतव्यों— कृष्णपट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
बंदरगाह पर पहुंचते ही इस नए आयात को तुरंत अनलोड कर लिया जाएगा ताकि देश के विभिन्न हिस्सों में समय पर उर्वरक पहुंचाया जा सके।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के बावजूद, भारत ने अपने उर्वरक भंडार (Fertilizer Stock) को न केवल सुरक्षित रखा है, बल्कि पिछले साल के मुकाबले इसमें बड़ी बढ़ोतरी भी दर्ज की है।
| उर्वरक का प्रकार | भंडार की स्थिति (लाख टन में) |
| यूरिया (Urea) | 81.44 |
| एनपीके (NPK) | 55.91 |
| एसएसपी (SSP) | 25.13 |
| डीएपी (DAP) | 20.92 |
| एमओपी (MOP) | 12.68 |
नोट: पिछले साल इसी अवधि में कुल भंडार 168.67 लाख टन था।
बिक्री के मोर्चे पर भी उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व संकट के बाद (1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 तक) कृषि गतिविधियां तेज होने से कुल उर्वरकों की बिक्री 153.4 लाख टन तक पहुंच गई है, जो पिछले साल इसी अवधि (140.2 लाख टन) की तुलना में 13.2 लाख टन अधिक है।
किसानों को ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकार ने दोतरफा रणनीति अपनाई है:
घरेलू उत्पादन: संकट के बाद देश में उर्वरकों का उत्पादन बढ़ाकर 133.12 लाख टन कर दिया गया।
ग्लोबल टेंडर और आयात: हाल ही में भारत ने 17.70 लाख टन यूरिया का कॉन्ट्रैक्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब तक ग्लोबल मार्केट से 90 लाख टन से ज्यादा यूरिया और पीएंडके (P&K) उर्वरकों का इंतजाम किया जा चुका है।
डिप्लोमैटिक तालमेल: यह बड़े पैमाने की खरीद विदेशों में मौजूद 28 भारतीय मिशनों की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति के कारण संभव हो पाई है।
भारत ने आपूर्ति के जोखिम को कम करने के लिए कई देशों के साथ समझौते किए हैं:
यूरिया के स्रोत: ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड।
डीएपी और एनपीके के स्रोत: रूस, मोरक्को, मिस्र, यूएसए, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब (लाल सागर मार्ग के जरिए)।
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