साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी (LNG) आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह; गुजरात को दी 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं की सौगात।
भारतीय रेलवे में नया अध्याय: अमित शाह ने साबरमती से देश की पहली ‘LNG ट्रेन’ को दिखाई हरी झंडी, 1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की दी सौगात”
साबरमती (अहमदाबाद): द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय रेलवे को आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी (LNG – लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इसके साथ ही उन्होंने साबरमती डिवीजन से जुड़ी 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पण किया।
अमित शाह द्वारा रवाना की गई इस विशेष ट्रेन में डीजल और एलएनजी (Dual-Fuel) दोनों से चलने वाली उन्नत प्रणाली का उपयोग किया गया है।
साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो की 1,400 हॉर्स पावर वाली दो ड्राइविंग पावर कारों में यह तकनीक स्थापित की गई है।
40% डीजल की बचत: इस प्रणाली में एलएनजी करीब 40 प्रतिशत तक पारंपरिक डीजल की जगह ले सकती है।
पर्यावरण और बजट के अनुकूल: गृह मंत्री ने रेलवे में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को भविष्य के लिए क्रांतिकारी बताते हुए कहा कि इस पहल से न केवल ईंधन की लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि कार्बन और प्रदूषक उत्सर्जन को घटाने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
माल ढुलाई (Freight) की क्षमता को नई रफ्तार देने के लिए साबरमती में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ‘WAG-12 लोकोमोटिव रखरखाव शेड’ तैयार किया गया है। यहां उच्च क्षमता वाले 300 इलेक्ट्रिक इंजनों का रखरखाव हो सकेगा।
12,000 हॉर्सपावर की ताकत: अमित शाह ने बताया कि WAG-12 इंजन 12,000 हॉर्स पावर की क्षमता रखता है, जिसे विशेष रूप से भारी और लंबी मालगाड़ियों को खींचने के लिए बनाया गया है।
दो इंजनों का काम करेगा अकेला: एक WAG-12 लोकोमोटिव अकेले करीब 600 ट्रकों के बराबर माल ढोने में सक्षम है।
पहले भारी मालगाड़ियों के लिए दो इंजन लगाने पड़ते थे, लेकिन अब यह अकेला इंजन उस कार्य को पूरा कर सकता है।
गृह मंत्री ने रेल हादसों को रोकने और परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए सुरक्षा से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाओं की भी जानकारी दी:
कवच सुरक्षा प्रणाली (411 करोड़ रुपये): अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-सामाखियाली रेलखंड के करीब 404 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर स्वदेशी ‘कवच’ प्रणाली लगाई जाएगी।
स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (118.83 करोड़ रुपये): साबरमती-कलोल-भांडू मोटीदाऊ और साबरमती-साणंद-जखवाड़ा रेलखंड के 122.57 किलोमीटर हिस्से में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू की गई है।
यह तकनीक दो ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और ट्रैक की क्षमता बढ़ाने में बेहद कारगर है।
यात्रियों और मालगाड़ियों की सुगम आवाजाही के लिए करीब 313.27 करोड़ रुपये की लागत से 21 किलोमीटर लंबी साबरमती-सरखेज रेल लाइन के दोहरीकरण का काम किया जाएगा।
मार्च 2028 तक पूरी होने वाली इस परियोजना के तहत साबरमती, गांधीग्राम, वस्त्रापुर और सरखेज स्टेशनों के विकास के साथ-साथ नए पुलों और अंडरपास (RUB) का भी निर्माण होगा।
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अमित शाह ने कहा कि दिल्ली से यात्रा करते समय वह कई बार साबरमती स्टेशन पर उतरे हैं, लेकिन आज इस स्टेशन का आधुनिक स्वरूप देखना बेहद खास अनुभव है।
उन्होंने इस कायाकल्प के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और साबरमती डिवीजन की पूरी टीम को बधाई दी।
शाह ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारतीय रेलवे में सुरक्षा, गति, आधुनिक तकनीक और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आया है।
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