NDRF and SDRF teams conducting rescue operations at the site of a three-story building collapse in Dhulkot village, Ambala

अंबाला के धूलकोट में 3 मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरी: 2 मजदूरों की मौत

अंबाला में बड़ा हादसा: धूलकोट गांव में 3 मंजिला निर्माणाधीन इमारत ताश के पत्तों की तरह ढही, 2 मजदूरों की मौत; मलबे में 15-20 लोगों के दबे होने की आशंका”

अंबाला: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

हरियाणा के अंबाला स्थित धूलकोट गांव में रविवार को एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया।

इस भीषण दुर्घटना में मलबे के नीचे दबने से अब तक दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 15 से 20 अन्य श्रमिकों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

हादसे के तुरंत बाद इमारत का मालिक और ठेकेदार मौके से फरार हो गए हैं। घटनास्थल पर एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चला रही हैं।

युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: एसडीएम दर्शन कुमार

अंबाला सिटी के एसडीएम (SDM) दर्शन कुमार ने घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए जानकारी दी कि सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड और स्थानीय एम्बुलेंस सेवाओं को मौके पर तैनात कर दिया गया है।

  • हताहतों की स्थिति: अब तक मलबे से दो मजदूरों के शव बरामद किए गए हैं। कई घायलों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया है, जिनमें से चार को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है,

  • जबकि पांच गंभीर घायलों का इलाज जारी है। मृतकों सहित अब तक कुल 12 लोगों की पहचान हो चुकी है।

  • मालिक और ठेकेदार फरार: एसडीएम ने बताया कि मलबे के अंदर सटीक रूप से कितने लोग फंसे हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन 15 से 20 लोगों के दबे होने का अनुमान है।

  • इमारत के मालिक और कॉन्ट्रैक्टर मौके से फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

वहीं, ‘डायल 112’ हेल्पलाइन के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती दौर में बुलडोजर की मदद से एक दबे हुए मजदूर को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया था।

लापरवाही की हद: 4 इंच की दीवार पर डाल दिया तीसरी मंजिल का लेंटर!

इस जानलेवा हादसे के पीछे निर्माण कार्य में बरती गई घोर लापरवाही और लालच की बात सामने आ रही है।

मौके पर मौजूद एक चश्मदीद के मुताबिक, इतनी बड़ी इमारत की दीवारें महज 4 इंच मोटी बनाई जा रही थीं।

इसके अलावा, निचली मंजिलों के कंक्रीट स्लैब (लेंटर) को सूखने और सेट होने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं दिया गया।

ढांचा अभी गीला और कच्चा ही था कि उसके ऊपर तीसरी मंजिल का स्लैब डाल दिया गया। अतिरिक्त भार सहन न कर पाने के कारण पूरी इमारत भरभराकर ढह गई।

कुमारी सैलजा ने जताया दुख, जून में भी हुआ था ऐसा हादसा

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद कुमारी सैलजा ने इस हृदयविदारक हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

उन्होंने मृतक श्रमिकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रशासन से अपील की है कि मलबे में फंसे प्रत्येक मजदूर को सुरक्षित निकालने के लिए पूरी तत्परता दिखाई जाए और घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था की जाए।

गौरतलब है कि अंबाला में इमारत गिरने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी साल 16 जून को अंबाला की पुरानी सब्जी मंडी में भी एक जर्जर इमारत ढह गई थी, जिसमें दो लोग मलबे में दब गए थे।

हालांकि, तब पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।