16वें वित्त आयोग: पंचायतों को ₹4.35 लाख करोड़ का अनुदान
16वें वित्त आयोग की सिफारिश: पंचायतों के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा, छत्तीसगढ़ को मिलेंगे 11,664 करोड़”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश के ग्रामीण विकास को नई गति देने और पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 16वें वित्त आयोग (FC-16) ने एक बड़े फंड की सिफारिश की है।
आयोग ने 2026-31 की अवधि के लिए सभी 28 राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों (RLBs) के लिए कुल ₹4,35,236 करोड़ के अनुदान की अनुशंसा की है।
इसमें से छत्तीसगढ़ राज्य की पंचायतों के विकास के लिए ₹11,664 करोड़ की राशि निर्धारित की गई है।
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (उर्फ ललन सिंह) ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में इस फंड और इसे खर्च करने के दिशानिर्देशों की विस्तृत जानकारी दी।
अनुदान का बँटवारा: 80% बेसिक और 20% परफॉर्मेंस ग्रांट
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, FC-16 अनुदान को दो मुख्य हिस्सों में बाँटा गया है— बेसिक ग्रांट (80%) और परफॉर्मेंस ग्रांट (20%)।
- टाइड ग्रांट (Tied Grant): बेसिक ग्रांट का 50% हिस्सा ‘टाइड’ है, जिसे पंचायतें केवल ‘स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ या ‘जल प्रबंधन’ जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर ही खर्च कर सकेंगी।
- अनटाइड ग्रांट (Untied Grant): बेसिक ग्रांट का शेष 50% और पूरा परफॉर्मेंस ग्रांट ‘अनटाइड’ रखा गया है।
- इसका उपयोग पंचायतें संविधान की 11वीं अनुसूची में शामिल 29 विषयों के तहत अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कर सकती हैं।
पंचायतों की आय (OSR) बढ़ाने के लिए सरकार के 5 बड़े कदम
पंचायतों को केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर न रहकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने ‘स्वयं के राजस्व स्रोत’ (OSR) को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं:
- विशेष प्रशिक्षण: IIM अहमदाबाद के सहयोग से एक ओएसआर ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किया गया है। 10 जुलाई 2026 तक, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के तहत 2,75,893 पंचायत प्रतिनिधियों को कर (Tax) और गैर-कर राजस्व जुटाने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- आत्मनिर्भर पंचायत पुरस्कार: राजस्व बढ़ाने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2025 में ‘आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार’ (ANPSA) की शुरुआत की गई है।
- समर्थ पंचायत पोर्टल: कर और गैर-कर मांगों को ऑनलाइन ट्रैक करने और टैक्स रजिस्टर बनाए रखने के लिए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है।
- मॉडल नियम: राज्यों को अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से टैक्स ढांचा मजबूत करने के लिए ‘स्वयं के राजस्व हेतु मॉडल नियम’ दिए गए हैं।
- स्वामित्व योजना: अप्रैल 2020 में शुरू की गई ‘स्वामित्व’ योजना के तहत गांवों में संपत्तियों की मैपिंग की जा रही है, जो भविष्य में पंचायतों के लिए ‘प्रॉपर्टी टैक्स’ इकट्ठा करने का एक मजबूत आधार बनेगी।
पारदर्शिता के लिए ‘ई-ग्रामस्वराज’ और ‘ऑडिट-ऑनलाइन’
केंद्रीय अनुदानों के इस्तेमाल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डिजिटल तकनीक का दायरा बढ़ाया है।
- ई-ग्रामस्वराज (eGramSwaraj): योजना बनाने से लेकर भुगतान तक का पूरा हिसाब इस पोर्टल (https://egramswaraj.gov.in) पर दर्ज होता है।
- इसे PFMS के साथ जोड़ा गया है, जिससे वेंडरों को रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट किया जाता है और जनता भी इस प्रगति को ऑनलाइन देख सकती है।
- ऑडिट-ऑनलाइन (Audit-Online): पंचायतों के खातों और वित्तीय प्रबंधन की ऑनलाइन जांच (ऑडिट) के लिए यह एप्लिकेशन लागू किया गया है, जो फंड के पारदर्शी उपयोग की गारंटी देता है।











