ऐतिहासिक कीर्तिमान: पीएम मोदी ने तोड़ा पंडित नेहरू का सबसे बड़ा रिकॉर्ड, बने भारत के सबसे लंबे समय तक ‘निर्वाचित’ प्रधानमंत्री “
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
इतिहास की किताबों में आज का दिन एक नए और स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का सबसे लंबे समय तक निरंतर बने रहने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
यह मुकाबला केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत—’जनता के अटूट भरोसे’ का है।
आज प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के लगातार 4399 दिन पूरे हो गए हैं, जो उन्हें भारतीय इतिहास में सबसे लंबे समय तक ‘निर्वाचित’ (Elected) प्रधानमंत्री के शिखर पर स्थापित करता है।
📊 ‘इलेक्शन’ बनाम ‘सिलेक्शन’: क्या है इस महा-रिकॉर्ड का गणित?
पंडित नेहरू और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के आंकड़ों के भीतर एक बेहद दिलचस्प गणित छिपा है, जो लोकतंत्र के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है:
| प्रधानमंत्री | पद पर रहने का स्वरूप | कुल ‘निर्वाचित’ दिन | विवरण |
| पंडित जवाहरलाल नेहरू | सिलेक्शन और इलेक्शन | 4398 दिन | कुल 6130 दिन पद पर रहे। लेकिन शुरुआती 1732 दिन (15 अगस्त 1947 से 13 मई 1952) बिना आम चुनाव के ‘सिलेक्शन’ (माउंटबेटन और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सहमति) से थे। 1952 के पहले चुनाव से लेकर अंत तक उनका निर्वाचित सफर 4398 दिनों का था। |
| नरेंद्र मोदी | पूर्णतः इलेक्शन | 4399 दिन (जारी है…) | 26 मई 2014 से लेकर आज तक एक भी दिन बिना चुनाव के नहीं बीता। लगातार तीन आम चुनावों में पूर्ण बहुमत और जनता के सीधे जनादेश की अग्निपरीक्षा को पार किया है। |
🇮🇳 146 करोड़ का नेतृत्व: मोदी राज की 12 सालों की 12 बड़ी उपलब्धियां
जब दुनिया भर में सरकारें बार-बार बदल रही हैं, तब 146 करोड़ की आबादी और विशाल सांस्कृतिक विविधता वाले देश में 12 वर्षों तक नीतियों में निरंतरता बनाए रखना एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। एक नजर मोदी सरकार की 12 साल की 12 ऐतिहासिक सफलताओं पर:
2014 (वित्तीय समावेशन): 58 करोड़ से ज्यादा ‘जनधन बैंक खाते’ खोले गए।
2015 (पारदर्शिता): 51 लाख करोड़ का ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT); 4 लाख करोड़ का लीकेज रुका।
2016 (गरीब कल्याण व सुरक्षा): उज्ज्वला योजना में 11 करोड़ मुफ्त LPG कनेक्शन; उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक।
2017 (आर्थिक सुधार): एकीकृत कर व्यवस्था की सबसे बड़ी योजना ‘GST’ लागू।
2018 (स्वास्थ्य): ‘आयुष्मान भारत’ से 60 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी।
2019 (ऐतिहासिक फैसला): जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का खात्मा।
2020-21 (संकट प्रबंधन): कोविड-19 महामारी में 220 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज का सफल अभियान।
2022 (बुनियादी सुविधा): ‘हर घर जल मिशन’ के तहत 16 करोड़ घरों तक नल से जल।
2023 (वैश्विक कूटनीति): भारत की पहली G-20 अध्यक्षता और उसकी सफल मेजबानी।
2024 (सांस्कृतिक गौरव): अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा।
2025 (आर्थिक महाशक्ति): जापान को पछाड़कर भारत बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था।
2025 (सामरिक प्रहार): पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत अचूक सैन्य कार्रवाई।
⚖️ ‘राज’ करना बनाम ‘सरकार’ चलाना: नेहरू और मोदी का वैचारिक फर्क
पंडित नेहरू और नरेंद्र मोदी ने एक ही देश, एक ही जमीन और एक ही जनता का नेतृत्व किया, लेकिन दोनों की कार्यशैली में बुनियादी अंतर रहा:
जड़ों से काटना बनाम सींचना: आलोचकों का मानना है कि नेहरू ने अपने राजनीतिक फैसलों से भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से काटने का प्रयास किया, जबकि मोदी ने उन्हीं जड़ों को वापस सींचने का काम किया है।
रूलर (Ruler) बनाम गवर्नर (Governor): नेहरू ने प्रचंड बहुमत के दम पर प्रेस पर सेंसरशिप लगाई और निजी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर ‘राज’ (Rule) किया।
वहीं, मोदी ने ‘सरकार’ (Govern) चलाई है। मोदी तीन बड़े पॉलिसी लक्ष्यों के साथ आए थे; उन्होंने बिना तानाशाही के लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अनुच्छेद 370 हटाया और राम मंदिर बनवाया।
🌍 वैश्विक मंच पर बढ़ता कद और सेवा भाव
गांधीजी ने कांग्रेस की प्रांतीय समितियों द्वारा सरदार पटेल के समर्थन के बावजूद नेहरू का समर्थन कर देश में राजनीतिक वंशवाद की नींव रखी।
इसके उलट, नरेंद्र मोदी ने पार्टी के आदेश पर 51 वर्ष की उम्र में सीधे गुजरात के सीएम की कुर्सी संभाली। उनके लिए सत्ता लक्ष्य नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है।
वैश्विक सम्मान: पीएम मोदी को अब तक फ्रांस, रूस, सऊदी अरब और यूएई सहित 32 देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है।
संसदीय संबोधन: वे अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस सहित दुनिया के 15 देशों की संसदों को संबोधित कर चुके हैं।
आने वाले दशकों में इतिहास जब भी किसी प्रधानमंत्री का मूल्यांकन करेगा, तो नरेंद्र मोदी द्वारा स्थापित ‘सेवा, सुशासन और अटूट जनादेश’ के इन 4399+ दिनों के मानकों को ही पैमाना माना जाएगा।
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