नई दिल्ली: मां… एक बालक जब जन्म लेता है और जब बोलना सीखता है, तो उसके मुंह से पहला शब्द यही निकलता है। वो दुनिया-जहान घूम आए लेकिन उसे सुकून इसी मां की गोद में मिलता है। ना जाने कितने शायरों ने मां पर शायरी लिखी होगी, कितनी कविताएं बनी होंगी। लेकिन एक मां ने इस शब्द की मर्यादा को तार-तार कर दिया। तारीख थी 5 जून 2024, वक्त सुबह के तकरीबन 6 बजे और जगह यूपी के उन्नाव में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बसा दरबारीखेड़ा गांव। यहां एक सूखे कुएं के अंदर खून से लथपथ एक युवक की लाश मिलती है। कुएं के पास ही एक मोटरसाइकिल भी गिरी पड़ी थी। छानबीन होती है तो पता चलता है कि ये लाश कानपुर के कपड़ा कारोबारी नदीम की है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, नदीम का कत्ल चाकू से गला रेतकर किया गया था। मौके से ऐसा कोई सुराग नहीं मिलता, जिसके जरिए पुलिस कातिल तक पहुंच सके। नदीम की लाश को देखकर मां का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस नदीम की कॉल डिटेल निकालती है तो पता चलता है कि मौत से ठीक पहले उसने अपनी पत्नी और उसके प्रेमी से बात की थी। ऐसे में पुलिस का शक उसकी पत्नी पर जाता है। पूछताछ में पता चलता है कि नदीम की पत्नी पिछले कई दिनों से अपने मायके में रह रही थी। अब पुलिस उसकी पत्नी और पत्नी के प्रेमी से पूछताछ करती है। पूछताछ में एक ऐसी कहानी खुलकर सामने आती है, जिसे सुनकर पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ जाते हैं। अभी तक पुलिस नदीम की पत्नी को उसका कातिल समझ रही थी, लेकिन कातिल कोई और निकलता है।
पूछताछ में नदीम की पत्नी बताती है कि उसकी अपने शौहर से बहुत कम बात होती है। साथ ही वो शक जताती है कि कत्ल के पीछे उसकी सास आरफा बेगम का हाथ हो सकता है। वहीं, नदीम की पत्नी का प्रेमी पुलिस को बताता है कि उसने आरफा बेगम को हत्या के बारे में बात करते हुए सुना था। अब कहानी में एक नया मोड़ आ जाता है। पुलिस नदीम की मां आरफा बेगम को हिरासत में लेती है। सख्ती से पूछताछ होती है तो आरफा बेगम अपना गुनाह कबूल कर लेती है। आरफा बेगम ने ढाई लाख रुपए की सुपारी देकर एक पेशेवर कातिल से नदीम का कत्ल करवाया था। अब सवाल उठता है कि एक मां ने अपने ही बेटे को इतनी बेरहमी से क्यों मरवाया? आखिर क्या वजह थी कि जिस बेटे को मां ने जन्म दिया, उसी की गर्दन पर चाकू चलवा दिया। दरअसल, नदीम के कत्ल की वजह उसकी मां यानी आरफा बेगम के अवैध संबंध थे। आरफा बेगम का पिछले काफी समय से अजमेर में रहने वाले अपने ही चचेरे भाई हासम अली के साथ अफेयर चल रहा था।
पुलिस पूछताछ में खुलासा होता है कि आरफा बेगम के प्रेम संबंधों को लेकर अक्सर नदीम की अपनी मां से बहस होती थी। नदीम के पिता का निधन हो चुका था और उसकी मां उन्नाव की सारी प्रॉपर्टी बेचकर अजमेर में अपने प्रेमी के साथ बसना चाहती थी। नदीम इसका विरोध करता था। ऐसे में आरफा बेगम ने अपने प्रेमी हासम अली के साथ मिलकर नदीम के कत्ल का प्लान बनाया। इस काम के लिए अजमेर में सुपारी किलर सलीम को चुना गया और ढाई लाख रुपए में डील तय हुई। 3 जून को सलीम कानपुर पहुंचा और आरफा बेगम ने उसे अपना रिश्तेदार बताते हुए नदीम से सलीम को शहर घुमाने के लिए कहा। 4 जून को दोपहर करीब 2 बजे नदीम अपनी मोटरसाइकिल पर सलीम को बिठाकर बाराबंकी के देवा शरीफ के लिए निकल पड़ा।
रात में लौटते वक्त सलीम ने उन्नाव में दरबारीखेड़ा गांव के पास बाइक रुकवाई। नदीम ने पूछा तो सलीम ने कहा कि वो रात को चरस पीता है। नदीम खड़ा होकर इंतजार करने लगा और तभी पीछे से आकर सलीम ने उसकी गर्दन पर चाकू चला दिया। इसके बाद उसने नदीम की लाश को कुएं में फेंका और मोटरसाइकिल वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया। आरफा बेगम की प्लानिंग थी कि नदीम के कत्ल के बाद वो सारी प्रॉपर्टी बेचकर अजमेर निकल जाएगी और अपने प्रेमी से शादी कर वहीं रहने लगेगी। हालांकि, उसकी साजिश का पर्दाफाश हो गया और पुलिस ने आरफा बेगम, उसके प्रेमी हासम अली और सुपारी किलर सलीम को गिरफ्तार कर लिया।
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