तिरुचिरापल्ली – स्‍वच्‍छता से खिल उठी मलिन बस्तियां

“अपने मंदिरों और जीवंत सड़कों के लिए प्रसिद्ध तमिलनाडु के व्यस्त शहर तिरुचिरापल्ली के हृदय में स्वच्छता क्रांति के साथ उल्‍लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहें हैं। शहर में विभिन्न संगठनों द्वारा प्रबंधित सामुदायिक शौचालयों का मॉडल मलिन बस्तियों के निवासियों को सशक्त बनाकर स्थायी प्रभाव पैदा कर रहा है”

यहाँ का परिदृश्य झुग्गी-झोपड़ियों के जीवन की आम कहानी से बिलकुल अलग है, जो अक्सर बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी से जुड़ी होती है। 

तिरुचिरापल्ली, स्वच्छता और सामुदायिक सामंजस्य का एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करता है। पिछले कुछ वर्षों में, तिरुचिरापल्ली में लगभग 400 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण किया गया है । 

इनमें से 150 शौचालयों का प्रबंधन स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा किया जाता है । इन्‍हें ‘साफ-सफाई स्वच्छता शिक्षा’ (शी) टीमों में संगठित किया गया है।

स्थानीय समुदायों की महिलाओं द्वारा संचालित इन टीमों ने न केवल स्वच्छता का आवश्‍यक बुनियादी ढाँचा प्रदान किया है, बल्कि ‘स्वच्छता और आत्मनिर्भरता’ की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया है।

ये शौचालय सुविधाओं के अलावा शहरों में रहने वाले गरीबों की गरिमा और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने की उनकी प्रतिबद्धता को परिलक्षित करते हैं।

शौचालयों के उचित उपयोग और रख-रखाव को सुनिश्चित करने के अलावा शी टीमों ने त्रिची को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) शहर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

तिरुचिरापल्ली की स्‍वच्‍छता और बदलाव की कहानियों के साथ, भारत ‘स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता (4एस) अभियान’ के तहत स्वच्छ भारत मिशन की 10वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है।

17‍ सितंबर से 2 अक्‍टूबर 2024 तक संचालित होने वाला वार्षिक ‘स्‍वभाव स्‍वच्‍छता, संस्‍कार स्‍वच्‍छता अभियान’ स्‍वच्‍छता ही सेवा परम्‍परा और महात्मा गांधी की जयंती के उपलक्ष्‍य में मनाए जाने वाले ‘स्वच्छ भारत दिवस’ का हिस्‍सा है।

यह अभियान देश में स्वच्छता के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति के उपलक्ष्य में एक दशक के समारोह कार्यक्रम में सभी क्षेत्रों के समुदायों, सरकार और हितधारकों को एक साथ लाता है और स्‍वच्‍छता की दिशा में व्यवहार परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करने वाले नए लक्ष्यों को बढ़ावा देता है।

‘स्‍वभाव स्‍वच्‍छता, संस्‍कार स्‍वच्‍छता’ अभियान तिरुचिरापल्ली जैसी समुदाय-संचालित पहल से काफी प्रभावित है, जहाँ नागरिक, विशेष रूप से महिलाएँ, स्वच्छता क्रांति में सबसे आगे हैं।

स्थानीय सरकारी निकायों के समर्थन से, ये अभियान स्वच्छता शिक्षा, शून्य-अपशिष्ट प्रथाओं और सामुदायिक स्वामित्व पर जोर देते हैं।

त्रिची में स्‍वभाव स्‍वच्‍छता संस्‍कार स्‍वच्‍छता टीमों द्वारा किये गये प्रयास गर्व और जवाबदेही की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं।  यह प्रयास स्वच्छता के लिए बुनियादी ढाँचे के निर्माण और इसे लंबे समय तक बनाए रखने के संकल्‍प को सुनिश्चित भी करते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भारत के स्वच्छता परिदृश्य को बदलने में  अनोखी मिसाल कायम की है। 26 सितंबर, 2024 तक, स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत शहरी क्षेत्रों में 6,36,826 सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।

इसी दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों में, 2,42,072 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया गया है, जो शौचालयों से वंचित असंख्‍य  लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ सुविधाएँ प्रदान करते हैं। 

ये आँकड़े सिर्फ़ आँकड़े नहीं हैं, ये उन लाखों लोगों के जीवन का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन पर बेहतर स्वच्छता का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

तिरुचिरापल्ली में बने ये शौचालय सिर्फ़ संरचनाएँ नहीं हैं;  ये स्‍वच्‍छता के प्रति लोगों की सोच में आए बदलाव का प्रतीक हैं, जहाँ स्वच्छता सिर्फ़ एक सरकारी निर्देश नहीं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।

स्‍वच्‍छता में आए इस बदलाव ने शी टीमों का प्रबंधन करने वाली महिलाओं के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ रोज़गार के अवसरों के द्वार खोले हैं। उनमें सशक्तिकरण की भावना को बढ़ावा दिया है।

साथियों के साथ मिलकर इस बदलाव के ‘दूत’ बनने वाले बच्चों से लेकर महिलाओं को रोजगार और नेतृत्व की भूमिकाएं मिलने तक, तिरुचिरापल्ली शहर ने यह दर्शाया है कि जब  अपने इलाकों में  समुदाय स्वच्छता की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं, तो कुछ भी असंभव नहीं होता। 

‘स्वभाव स्वच्छता संस्कार स्वच्छता (4एस) अभियान’ देश भर में तिरुचिरापल्‍ली जैसे मॉडल को दोहराने और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि पिछले दशक के लाभों को न केवल बरकरार रखा जाए, बल्कि स्‍वच्‍छता की दिशा में नई उपलब्धियों की प्राप्ति के लिए उन्‍हें विस्तारित भी किया जाए।

भारत, वर्ष 2024 का स्वच्छ भारत दिवस मनाने की तैयारियां कर रहा है।  तिरुचिरापल्ली की कहानी यह बताती है कि बदलाव समुदाय के भीतर से आता है।

स्‍वच्‍छ भारत अभियान ने लोगों को अपने पर्यावरण का स्वामित्व लेने के लिए सशक्त बनाकर, शौचालयों के निर्माण से कहीं अधिक गरिमा, स्वास्थ्य और आशा की विरासत से जुड़े एक आंदोलन को जन्म दिया है।

Santosh SETH

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