“अटाला माता मंदिर केस की सुनवाई सिविल न्यायालय सीनिअर डिवीजन कोर्ट में चल रही है। मामला पोषणीय है या नहीं तथा कोर्ट को सुनवाई का क्षेत्राधिकार है या नहीं इस बिंदु पर मंगलवार को फैसला आना था लेकिन फैसला टल गया है। अब कोर्ट ने फैसले के लिए 27 सितंबर तिथि मुकर्रर किया है”
जौनपुर 05 / 09 / 2024 वरुण यादव की रिपोर्ट
पिछली सुनवाई पर वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने दौरान बहस कहा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के प्रथम महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी रिपोर्ट में अटाला मस्जिद को अटाला देवी मंदिर बताया है जिसका निर्माण कन्नौज के राजा जयचंद राठौर ने करवाया था।
अंग्रेज़ अधिकारी जे पी हेविट और ई बी हावेल ने अटाला मस्जिद की शिल्प कला को हिन्दू शिल्पकला बताया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में अटाला देवी मंदिर के अनेक फोटोग्राफ दिए गए है जिनमें शंख, त्रिशूल, षटदल कमल, गुड़हल के फूल, बंधन बार आदि दिए गए है जोकि हिन्दू शिल्पकला है।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया की अटाला मस्जिद की जमीन राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद के नाम से दर्ज है जिसकी वर्तमान मालिक केंद्र सरकार है।
अटाला मस्जिद का वक़्फ़ एक्ट 1995 की धारा 4 के अनुसार आज तक सर्वे नहीं हुआ है जिस कारण उनके केस पर वक़्फ़ कानून लागू नहीं होता है।
अटाला मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन संरक्षित स्मारक है जिस कारण केस पर पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है।
माननीय न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पोषणीयता व क्षेत्राधिकार पर आदेश की तिथि 2 सितम्बर नियत किया था।कोर्ट ने पुन: आदेश के लिए 27 सितंबर की तिथि नियत किया।
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