Former RAW agent Lucky Bisht questioning China's silent war tactics amidst massive flash floods in Nepal originating from Tibet

नेपाल बाढ़ : हादसा या साजिश! पूर्व RAW अधिकारी लकी बिष्ट ने उठाए सवाल

नेपाल बाढ़ : पूर्व RAW अधिकारी लकी बिष्ट का बड़ा आरोप- “जानकारी छिपाकर पड़ोसी को तबाही में धकेलना चीन का ‘साइलेंट वार’ है”

नई दिल्ली/काठमांडू : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही अभी थमी भी नहीं है कि देश में एक बार फिर से बड़े खतरे का अलर्ट जारी कर दिया गया है।

 

शुक्रवार को अधिकारियों ने जानकारी दी कि चीन के तिब्बती क्षेत्र में एक नई झील फटने की सूचना मिली है, जिससे नेपाल के निचले इलाकों में दोबारा प्रलयंकारी बाढ़ आ सकती है।

रसुवा जिले में भोटेकोसी नदी (Bhotekoshi River) के उसी इलाके में, जहां 26 अगस्त को भारी तबाही हुई थी, शुक्रवार को पानी का बहाव मलबे और कीचड़ के साथ फिर से खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

पूर्व RAW अधिकारी लकी बिष्ट ने चीन को घेरा

नेपाल में हो रही इस लगातार तबाही के बीच, भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) के पूर्व अधिकारी लकी बिष्ट (Lucky Bisht) ने इस आपदा के पीछे चीन की सोची-समझी साजिश और उसके खतरनाक मंसूबों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बिष्ट ने लिखा:

“चीन आज दावा करता है कि उसकी AI और सैटेलाइट प्रणाली इतनी एडवांस है कि वह सालों बाद आने वाली बारिश का अलर्ट भी आज ही जारी कर देता है।

फिर यह ताज्जुब की बात है कि तिब्बत में इतना बड़ा ओवरफ्लो हो रहा था, उसकी जानकारी चीन ने नेपाल को क्यों नहीं दी?

समय रहते कोई अलर्ट जारी क्यों नहीं किया गया? क्या यह सिर्फ एक तकनीकी चूक थी या चीन की सोची-समझी खामोशी?”

‘तिब्बत तुम्हारा है, तो तबाही की जिम्मेदारी भी तुम्हारी’

लकी बिष्ट ने चीन की दोहरी नीति पर प्रहार करते हुए कहा कि चीन हमेशा तिब्बत को अपना अटूट हिस्सा बताता है।

अगर ऐसा है, तो वहां से निकलने वाली नदियों के उफान और उससे पड़ोसी देश में होने वाली तबाही की पूरी जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।

उन्होंने कहा कि चीन की इस जानलेवा खामोशी की कीमत नेपाल ने हजारों बेकसूरों की जान गंवाकर चुकाई है।

लाखों लोग लापता हैं और नेपाल के कई महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स (जलविद्युत परियोजनाएं) पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जिससे देश को अरबों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

डेटा छिपाना भी एक ‘साइलेंट वार’ है

पूर्व खुफिया अधिकारी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचते हुए कहा,

“इतना बड़ा विनाश होने के बावजूद हर कोई चीन को इस दोष से बचाने और असली सवाल से ध्यान भटकाने में व्यस्त दिखता है। आज का युद्ध सिर्फ सीमाओं पर बंदूकों से नहीं लड़ा जाता।

जरूरी जानकारी को रोककर और महत्वपूर्ण डेटा छिपाकर अपने पड़ोसी को तबाही में धकेलना भी एक साइलेंट वार (Silent War) ही है।”

बिष्ट ने अंत में सवाल उठाया कि चीन को इस खतरे की खबर असल में कब थी और उसने जानबूझकर नेपाल को समय रहते आगाह क्यों नहीं किया?