जानिए! आखिर क्यों ? बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्षरत है ‘जेन अल्फा’
हक के लिए सड़कों पर ‘जेन अल्फा’: यूपी से लेकर राजस्थान तक, बुनियादी सुविधाओं के लिए स्कूली बच्चों का हल्ला बोल”
नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN
कहीं क्लासरूम में पंखा नहीं है, कहीं पीने का पानी मयस्सर नहीं, तो कहीं मिड-डे मील में कीड़े मिल रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था की इन जर्जर बुनियादी कमियों को पहले की पीढ़ियां भले ही अपनी नियति मान लेती थीं,
लेकिन आज की ‘जेन अल्फा’ (Generation Alpha) खामोश बैठने को तैयार नहीं है। बीते कुछ हफ्तों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं,
जहां वोट देने के अधिकार से वंचित ये छोटे-छोटे स्कूली बच्चे अपने हक के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
मूक-बधिर छात्रों का अनूठा प्रदर्शन (जयपुर)
हाल ही में राजस्थान के जयपुर स्थित सरकारी ‘सेठ आनंदी लाल पोद्दार हायर सेकेंडरी स्कूल फॉर डेफ एंड म्यूट’ (मूक-बधिर विद्यालय) के छात्रों ने स्कूल की बदहाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
592 छात्रों वाले इस स्कूल में दरकती दीवारें, खराब टॉयलेट, कचरे का अंबार और जर्जर बसें मुख्य मुद्दा थीं।
इन मूक-बधिर बच्चों ने साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) के जरिए अपनी शिकायतें दुनिया के सामने रखीं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन और राजनेताओं को भागकर स्कूल पहुंचना पड़ा।
यूपी: कहीं कलेक्टर के दफ्तर पर धरना, कहीं रोका विधायक का काफिला
उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों के तेवर सबसे ज्यादा आक्रामक दिखे हैं:
- हमीरपुर: 11 अगस्त को चंदूपुर ग्राम पंचायत के छात्र तिरंगा यात्रा निकालते हुए कीचड़ भरे रास्तों से 5 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
- उनकी मांग थी कि स्कूल तक पक्की सड़क बने। वे गेट पर डट गए, जिसके बाद प्रशासन को 1 करोड़ के रुके हुए प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने का आश्वासन देना पड़ा।
- फतेहपुर: 28 जुलाई को किशनपुर के सर्वोदय इंटर कॉलेज के करीब 1,500 छात्र भीषण गर्मी में बिना पंखों वाली क्लास से बाहर आ गए।
- 5-6 घंटे के धरने के बाद स्कूल प्रशासन को हर क्लास में चार पंखे, सही डेस्क और लाइब्रेरी की मांग माननी पड़ी।
- बस्ती और पीलीभीत: पीलीभीत के जवाहर नवोदय विद्यालय में प्रदर्शन हुआ, तो वहीं बस्ती में स्कूली बच्चों ने जर्जर सड़क बनवाने की मांग को लेकर सीधे स्थानीय विधायक (MLA) का काफिला ही रोक दिया।
बिहार और एमपी में भी गूंजी आवाज
- बिहार (गया): सिमुआरा मिडिल स्कूल के 40-50 बच्चे खराब मिड-डे मील, गंदे टॉयलेट और टूटी बेंच की शिकायत लेकर सीधे एसडीएम (SDM) के पास पहुंच गए।
- जूनियर अधिकारियों की बजाय सीधे शीर्ष अधिकारी से बात करने के इस आत्मविश्वास ने सबको चौंका दिया।
- मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा): एक आवासीय विद्यालय के छात्रों ने दाल और सब्जी में बार-बार कीड़े निकलने के विरोध में मोर्चा खोल दिया।
- राजस्थान (बाड़मेर और जालौर): शिक्षकों की कमी से नाराज छात्रों ने सीधे स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया, जिसके बाद शिक्षा अधिकारी को तुरंत तीन शिक्षकों की तैनाती करनी पड़ी।
जेन ज़ी (Gen Z) से सीख रही है जेन अल्फा
इन विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले अधिकांश बच्चे इतने छोटे हैं कि उनके पास कोई राजनीतिक या चुनावी ताकत नहीं है।
लेकिन वे स्मार्टफोन और इंटरनेट के दौर में बड़े हो रहे हैं। वे दुनिया भर की जानकारी रखते हैं और जानते हैं कि उन्हें किन अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
अपने विरोध को असरदार बनाने के लिए ये बच्चे सोशल मीडिया को अपना सबसे मजबूत हथियार बना रहे हैं।
सड़क पर तख्तियां लिए इन छोटे बच्चों को प्रशासन के लिए नजरअंदाज करना अब संभव नहीं रह गया है।
यह साफ है कि ‘जेन अल्फा’ ने यह सबक वक्त से पहले ही सीख लिया है कि अगर सिस्टम काम न करे, तो जवाबदेही कैसे तय करवानी है।











