चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: TMC के नाम और ‘फूल-घास’ चिह्न पर रोक
TMC में बड़ी बगावत का असर: चुनाव आयोग ने ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम पर लगाई अंतरिम रोक”
कोलकाता/नई दिल्ली: संतोष सेठ की रिपोर्ट : (THE POLITICS AGAIN)
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अप्रत्याशित और बड़ा भूचाल आ गया है। 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनावों (रेजीनगर और नंदीग्राम) से ठीक पहले, चुनाव आयोग (EC) ने एक ऐतिहासिक अंतरिम आदेश जारी किया है।
इस आदेश के तहत, सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके 28 साल पुराने मशहूर चुनाव चिह्न “फूल और घास” (जोरा घास फूल) के इस्तेमाल पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी गई है।
यह फैसला टीएमसी (TMC) के भीतर मची अंदरूनी कलह और पार्टी के दो फाड़ होने के बाद आया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मुख्य गुट ने गुरुवार देर रात चुनाव आयोग को नए नामों और चुनाव चिह्नों के विकल्प सौंप दिए हैं, लेकिन साथ ही आयोग के इस फैसले पर कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है।
चुनाव आयोग का दोनों गुटों को निर्देश
चुनाव आयोग ने गुरुवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ विवाद में शामिल दोनों गुटों (ममता बनर्जी गुट और बागी गुट) को निर्देश दिया कि आगामी उपचुनावों के लिए कोई भी पक्ष मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करेगा।
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EC ने दोनों पक्षों से कहा है कि वे निर्दलीय या गैर-मान्यता प्राप्त दलों के लिए उपलब्ध ‘फ्री चुनाव चिह्नों’ की सूची में से अपनी पसंद का चुनाव चिह्न और नया नाम चुनें।
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प्रस्तावित नाम मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से मिलता-जुलता हो सकता है।
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आयोग ने स्पष्ट किया है कि ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के पैरा 15 के तहत विवाद के अंतिम समाधान तक यह ‘अंतरिम व्यवस्था’ लागू रहेगी।
TMC में बगावत की पूरी कहानी
ममता बनर्जी के लिए यह 28 साल के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा झटका है। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनी TMC की पहचान ममता का हाथ से बनाया ‘फूल और घास’ का चिह्न ही रहा है। बगावत की शुरुआत मई में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुई।
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विधानसभा में फूट: 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय को नकारते हुए पार्टी से निकाले गए नेता रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता (LoP) चुन लिया और विधानसभा स्पीकर से इसकी मान्यता भी हासिल कर ली।
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संसद तक पहुंची बगावत: पांच दिन बाद, सीनियर नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले NDA को एक “अलग गुट” के तौर पर समर्थन देने की घोषणा कर दी।
इस भारी राजनीतिक उलटफेर और चुनाव आयोग के फैसले के बाद, अब बंगाल उपचुनावों में TMC को एक नए नाम और नई पहचान के साथ जनता के बीच जाना होगा, जो राज्य की राजनीति की दशा और दिशा दोनों तय करेगा।











