पुष्पा' वाले TMC नेता जहांगीर खान पहुंचे हाई कोर्ट
‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ वाले TMC नेता के बदले सुर: कलकत्ता HC में लगाई सुरक्षा की गुहार, CM शुभेंदु बोले थे- ‘पुष्पा अब मेरी जिम्मेदारी’
कोलकाता: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान अपने आक्रामक बयानों और फिल्मी डायलॉग से सुर्खियों में रहने वाले टीएमसी (TMC) नेता जहांगीर खान के तेवर अब राज्य में नई सरकार बनते ही ठंडे पड़ते दिख रहे हैं।
बंगाल में सत्ता परिवर्तन और शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के मुख्यमंत्री बनने के बाद, जहांगीर खान ने अब खुद की सुरक्षा के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) का दरवाजा खटखटाया है।
‘झूठी FIR दर्ज हो रही हैं’- जहांगीर खान का आरोप
टीएमसी नेता जहांगीर खान ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि नई सरकार बनने के बाद उनके खिलाफ कई झूठी एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही हैं।
तत्काल सुनवाई की मांग: उनके वकील किशोर दत्ता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की अदालत में इस मामले को उठाया और सुरक्षा प्रदान करने के लिए तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है।
‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ से ‘पुष्पा मेरी जिम्मेदारी’ तक का सफर
जहांगीर खान चुनाव के दौरान उस वक्त सबसे ज्यादा वायरल हुए थे, जब उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए आईपीएस अजय पाल शर्मा (IPS Ajay Pal Sharma) के सामने फिल्मी अंदाज में कहा था, “पुष्पा झुकेगा नहीं।”
हालांकि, राज्य में प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनने के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर जहांगीर खान पर निशाना साधा था।
मुख्यमंत्री ने टीएमसी नेता को सख्त चेतावनी देते हुए कहा था, “पुष्पा अब मेरी जिम्मेदारी है।” इसका सीधा अर्थ था कि अब उनके मामलों से नई सरकार खुद सख्ती से निपटेगी।
फलता सीट पर 21 मई को दोबारा होना है मतदान
जहांगीर खान फलता (Falta) विधानसभा सीट से टीएमसी के उम्मीदवार हैं। यह वही हॉट सीट है, जहां चुनाव आयोग (Election Commission) के आदेश के बाद 21 मई को दोबारा चुनाव (Re-election) होने जा रहे हैं और इसके नतीजे 24 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे।
विपक्ष में, TMC, नेताओं में खौफ
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है, जबकि सत्ताधारी रही टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर विपक्ष में बैठ गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्ता जाने और भाजपा की सख्त सरकार बनने के बाद टीएमसी नेताओं में अपने पुराने मामलों और अवैध कामों के खुलने का डर सताने लगा है, जिसके चलते वे अब अदालत की शरण ले रहे हैं।
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