“वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर माहौल गर्म है। सरकार कल यानी 2 अप्रैल को दोपहर 12 बजे लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करेगी। इस बीच वक्फ विधेयक को लेकर बयानबाजी जारी है और एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान का उल्लंघन बताया”
नई दिल्ली 01 / 03 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
वक्फ संशोधन बिल जेपीसी में चर्चा के बाद कल यानी दो अप्रैल को संसद में पेश किया जाएगा। इस बिल को लेकर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू की बीजेपी के लोकसभा सचेतकों के साथ आज बैठक हुई है। वहीं, इस बिल को मंजूरी मिलने से पहले सियासत गरमाई हुई है।
वक्फ संशोधन विधेयक पर जहां एनडीए की सहयोगी जेडीयू ने साफ कह दिया है कि वो वक्फ संशोधन विधेयक पर संसद में स्टैंड लेगी, इससे इस बिल को मंजूरी मिलने में परेशानी हो सकती है। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा, “विपक्ष के पास विरोध के अलावा कोई काम नहीं है। हम वो सब करेंगे जिससे देश और नागरिकों को फायदा हो।
कांग्रेस ने कही ये बात…
वक्फ संशोधन विधेयक पर कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने कहा, “अगर यह हमारे अनुकूल तरीके से लाया जाता है तो हम इसका स्वागत करते हैं। हालांकि, इसमें हमारे सदस्यों द्वारा दिए गए सभी बदलावों को शामिल किया जाना चाहिए।”
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा, “इस बिल को चर्चा का हिस्सा बनने दीजिए और इसमें बहुत सारी खामियां है। जब ये जेपीसी में गया तो जो संशोधन होने चाहिए थे वो नहीं हुए बल्कि और संशोधन हो गए और ये देश जिस तरह से चलता है उसके हिसाब से नहीं है। इस पर जब चर्चा होगी तो बात होगी… ये निश्चित तौर पर देश की धर्मनिरपेक्षता के लिए सही नहीं है।”
बिल पर शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा, “हम वक्फ संशोधन विधेयक लाने जा रहे हैं। बालासाहेब ठाकरे चाहते थे कि वक्फ कानून को खत्म कर दिया जाए क्योंकि इस कानून का वास्तविक उपयोग गरीब अल्पसंख्यकों, गरीब मुसलमानों के लिए होना चाहिए।
लेकिन वक्फ बोर्ड के ये चंद मुस्लिम नेता वक्फ की संपत्ति को लूट रहे हैं, इसका उपयोग गरीब मुसलमानों के लिए नहीं हो रहा है। वक्फ संशोधन विधेयक जो आया है, उससे गरीब मुसलमानों को फायदा होने वाला है।”
भाजपा ने रखा अपना पक्ष
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने वक्फ (संशोधन)विधेयक पर कहा, “…वक्फ गरीब मुसलमानों के लिए स्वप्न को पूरा करने जैसा है। यह उनकी बदहाली की अवस्था को ठीक करने वाला बिल है। इस बिल में किसी भी वक्फ की एक इंच जमीन को न तो सरकार ले रही है और न ही कोई और ले रहा है।
किसी को भी न्यायालय में अपनी बात, अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा, यदि कोई इस संशोधन का विरोध करता है तो मैं समझता हूं कि वे संविधान का विरोधी है और भीम राव अंबेडकर का विरोध करने वाला है।”
जदयू ने कही ये बात
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा, “JDU और नीतीश कुमार जी को कांग्रेस के सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है वो अपने गिरेबान में झांक के देखें। उन्होंने इस देश और बिहार में कितने साल शासन किया?
उन्होंने मुसलमानों के लिए क्या किया.. नीतीश कुमार जी ने पिछले 20 वर्षों में मुसलमानों के हक और उनके उत्थान के लिए जो काम किया है वो देश में आजादी के बाद किसी राज्य में आज तक किसी सरकार ने नहीं किया।
सैयद नसरुद्दीन कहा…
ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ (संशोधन)विधेयक पर कहा, “इस बिल के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है जो कि सही नहीं है। असहमति होना अलग बात है।
हमारा मानना है कि जो भी बिल आए वह वक्फ की समस्त धार्मिक सम्पत्ति के हित में होना चाहिए और सरकार की मंशा भी यही है… जो लोग गुमराह करने का काम कर रहे हैं उनसे मैं यह आग्रह करूंगा कि यह गुमराह करने का समय नहीं है। सब मिलकर एक अच्छी बिल पास करवाएं। यह वक्त की जरूरत है…”
समाजवादी पार्टी का कहना है…
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वक्फ (संशोधन)विधेयक पर कहा, “…भाजपा हर जगह हस्तक्षेप करना चाहती है और भाजपा हर चीज पर अपना नियंत्रण करना चाहती है… भाजपा किससे क्या कहलवा दे, किससे क्या करवा दे, यह भाजपा का कमाल है।”
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, “समाजवादी पार्टी और हमारे नेता अखिलेश यादव पहले ही दिन से वक्फ संशोधन बिल को सदन में लाने का विरोध कर रहे थे। हमारे विरोध की वजह से इस बिल को JPC को सौंपा गया हालांकि (JPC में) विपक्ष के जितने भी सदस्य थे उनके संशोधनों और सुझावों को स्वीकार नहीं किया गया।
वक्फ बिल को लेकर आम आदमी सड़कों पर निकलकर अपनी बात रखने का प्रयास कर रहा है क्योंकि उसे लग रहा है कि सदन में उसे न्याय नहीं मिल पा रहा है। कहीं न कहीं भाजपा की निगाह इस देश की बेशकीमती वक्फ जमीनों पर है, जिस पर वे(भाजपा) कब्जा करके अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपना चाहती है…”
टीडीपी ने कहा
तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने कहा, “पूरा मुस्लिम समुदाय वक्फ संशोधन विधेयक के पेश होने का इंतजार कर रहा है…हमारी पार्टी इसका समर्थन करेगी। चंद्रबाबू नायडू पहले ही कह चुके हैं कि हम मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए काम करेंगे। कल विधेयक पेश किया जाएगा, उसके बाद ही हम इस पर कोई टिप्पणी करेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं।”
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के विरोध पर JPC के अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा, “यह विरोध कहीं न कहीं किसी सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है।
कल ईद में जिस तरह से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड(AIMPLB) ने काली पट्टी बांधकर विरोध करने के लिए कहा… ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पवित्र रमजान के महीनें को भी इबादत की जगह सियासत बना दिया… अगर राजनीति करनी है या विरोध करना है तो जंतर-मंतर पर जाकर कीजिए… लोगों को झूठ बोलकर गुमराह किया जा रहा है…
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू कह रहे हैं कि हम(सत्ता पक्ष) वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं, विपक्ष के मंत्री सदन में आएं और चर्चा करें… खुद ही सरकार ने अध्यक्ष से आग्रह किया था कि इस बिल पर JPC की बैठक हो।
यह लोग कहीं न कहीं देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं… सरकार साफ कह रही है कि वक्फ के लिए एक बेहतर और पारदर्शी कानून लाया जाएगा… यदि व्यवस्थाओं को ठीक करने का काम किया जा रहा है फिर भी देश में विरोध क्यों बढ़ रहा है?”
सरकार लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पेश करने जा रही है। सरकार मंशा लोकसभा से इसे पारित कराने की है। संसद की एक संयुक्त समिति की रिपोर्ट के बाद संशोधित किए गए वक्फ विधेयक को लोकसभा में विचार और पारित किए जाने के प्रक्रिया शुरू होगी।
सरकार की तरफ से इस बिल को पारित कराने की जिम्मेदारी खुद पार्टी के चाणक्य अमित शाह ने उठाई है। अमित शाह बिल के पेश होने से पहले एक्टिव हो गए हैं। हालांकि, सबकी नजर मुस्लिम समुदाय में मजबूत पैठ रखने वाले एनडीए के दो सहयोगी दलों के रुख पर लगी हुई है।
जेडीयू सांसदों से मिले अमित शाह
वक्फ संशोधन बिल को लेकर अमित शाह एनडीए के सहयोगी और बिहार में सरकार के साझेदार जदयू को साधने में जुट गए। शाह ने ललन सिंह और संजय झां के साथ बैठक की। बैठक में शाह ने जदयू सांसदों के साथ वक्फ संशोधन बिल को लेकर चर्चा की।
बिहार में बीजेपी की अहम सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी ने भी वक्फ बिल को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। वक्फ संशोधन बिल को लेकर लोजपा सांसद ने कहा कि अभी बिल को लेकर अभी तक संसद में चर्चा नहीं हुई है लेकिन विपक्ष बिल को लेकर भ्रम फैला रहा है।
टीडीपी का मिलेगा समर्थन
एनडीए की एक और अहम सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी ने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने का फैसला किया है। टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम कुमार जैन ने मंगलवार को कहा कि पार्टी वक्फ (संशोधन) विधेयक के समर्थन में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं।
बिल के बारे में बोलते हुए प्रेम कुमार जैन ने कहा कि पूरा मुस्लिम समुदाय वक्फ संशोधन विधेयक के पेश होने का इंतजार कर रहा है…हमारी पार्टी इसका समर्थन करेगी। चंद्रबाबू नायडू पहले ही कह चुके हैं कि हम मुस्लिम समुदाय के हितों के लिए काम करेंगे। कल बिल पेश किया जाएगा, उसके बाद ही हम इस पर कोई टिप्पणी करेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि चंद्रबाबू नायडू मुसलमानों के पक्ष में हैं।
आईयूएमएल करेगी विरोध
आईयूएमएल ने संसद में पेश होने जा रहे वक्फ संशोधन बिल का विरोध किया है। इस मामले में आईयूएमएल सांसद ई. टी. मोहम्मद बशीर ने वक्फ संशोधन बिल को ‘असंवैधानिक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल को सदन में पेश किया जाएगा तो हम इसका विरोध करेंगे। क्योंकि इस बिल के माध्यम से वक्फ की जमीनों को छीनने की कोशिश की जाएगी।
आईयूएमएल सांसद ने कहा कि बिल को लेकर जेपीसी बनी। जेपीसी के ही कुछ सदस्यों ने इस बात का खुलासा किया है कि उनकी बातों को नहीं सुना गया। यह बिल पूर्ण रूप से असंवैधानिक है और देश के लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। अगर यह बिल संसद में दोबारा लाया जाता है, तो हम इसका विरोध करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा का इस बिल के माध्यम से वक्फ की जमीनों पर कब्जा करने का एजेंडा है।
लोकसभा, राज्यसभा का नंबर गेम
वक्फ संशोधन बिल पेश करने के साथ ही सरकार ने विपक्ष को किनारे करने की रणनीति भी बना ली है। बिल को पारित कराने को लेकर सरकार के पास संसद में संख्या बल पर्याप्त संख्या बल है। लोकसभा में 542 सांसदों में एनडीए के पास 293 सांसद हैं।
वहीं, बिल को पारित कराने को लेकर सरकार को 272 सांसदों के समर्थन की ही जरूरत है। वहीं, इंडिया दल के सहयोगियों की सभी सीटों को मिला दे तो भी यह आंकड़ा सिर्फ 233 तक ही पहुंचता है। राज्यसभा में नंबर गणित सरकार के पक्ष में है।
राज्यसभा में इस समय 236 सदस्य हैं। बीजेपी के सांसदों की संख्या 98 है। एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 115 के करीब है। छह मनोनीत सदस्यों को मिलाने से यह आंकड़ा 121 पहुंच जाता है। वहीं, इस बिल को पारित करने के लिए 119 सांसद की जरूरत है।
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