वाराणसी रोपवे: किराया तय, कैंट से गोदौलिया का सफर मात्र ₹50 में
वाराणसी में देश के पहले अर्बन रोपवे का सफर जल्द: कैंट से गोदौलिया मात्र 15 मिनट में, न्यूनतम किराया ₹10; स्विट्जरलैंड से होगी निगरानी”
वाराणसी: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में विकास के अध्याय में एक नया और ‘स्वर्णिम’ पन्ना जुड़ने जा रहा है।
बनारस में देश के पहले शहरी सार्वजनिक परिवहन (Urban Public Transport) रोपवे का सफर जल्द ही शुरू होने वाला है।
यात्रियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि इसके किराए की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, 3.75 किलोमीटर लंबे इस हाईटेक रोपवे के पहले चरण (कैंट रेलवे स्टेशन से रथयात्रा) का संचालन इस बार सावन के महीने में शुरू करने की पूरी तैयारी है।
किराया: किफायती और आम आदमी के बजट में
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोपवे का किराया बेहद किफायती रखा गया है।
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न्यूनतम किराया: ₹10 (विद्यापीठ से रथयात्रा तक)
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अधिकतम किराया: ₹50 (कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक की पूरी यात्रा)
‘काशी स्मार्ट पास’ पर मिलेगी 20% की छूट
स्थानीय नागरिकों और नियमित यात्रा करने वालों के लिए विशेष ‘काशी स्मार्ट पास’ की सुविधा दी जाएगी, जिस पर 20 फीसदी की अतिरिक्त छूट मिलेगी।
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छूट के बाद कैंट से गोदौलिया का किराया मात्र ₹40 रह जाएगा।
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विद्यापीठ से रथयात्रा का किराया मात्र ₹8 लगेगा।
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नोट: निर्धारित किराया दरों में हर साल 1 अप्रैल से 5 फीसदी की वृद्धि की जाएगी।
जाम से मिलेगी मुक्ति, बचेगा समय
वर्तमान में सड़क मार्ग से कैंट से गोदौलिया जाने में 30 से 45 मिनट और जाम में इससे भी अधिक समय लग जाता है। लेकिन रोपवे शुरू होने के बाद यह दूरी हवा में उड़ते हुए मात्र 15 से 16 मिनट में पूरी हो जाएगी।
पर्यटकों के लिए प्रीमियम सर्विस और क्लॉक रूम
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क्लॉक रूम: कैंट रोपवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए क्लॉक रूम (सामान घर) की सुविधा होगी।
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टिकट धारकों के लिए शुरुआती 2 घंटे तक सामान रखना मुफ्त होगा। इसके बाद 15 किलो तक के सामान के लिए ₹50 प्रति घंटा शुल्क लगेगा।
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प्रीमियम गंडोला: विशेष पर्यटकों के लिए प्रीमियम गंडोला सेवा का किराया ₹2000 प्रति यात्रा तय किया गया है।
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किसी संस्था या समूह द्वारा एडवांस बुकिंग कराने पर यह शुल्क ₹1200 प्रति गंडोला होगा।
अत्याधुनिक तकनीक: स्विट्जरलैंड से रखी जाएगी नजर
बनारस का यह रोपवे पूरी तरह से हाईटेक और सुरक्षित है:
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SCADA सिस्टम: सुरक्षा के लिए देश के सबसे आधुनिक कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर आधारित ‘स्काडा’ (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम का प्रयोग किया गया है।
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विदेशी निगरानी: स्विट्जरलैंड की बर्थोलेट (Bartholet) कंपनी के विशेषज्ञ सिस्टम पर सीधी नजर रखेंगे।
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कोई भी तकनीकी दिक्कत आने पर वे ऑनलाइन एक्सेस लेकर स्विट्जरलैंड से ही फॉल्ट रिकवरी कर सकेंगे।
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सेफ्टी स्कैनर्स: केबल (तार) के घिसने या पतला होने की जानकारी के लिए विशेष स्कैनर्स लगाए गए हैं।
खराब मौसम में क्या होगा?
रोपवे के गंडोला (केबल कार) यूरोपियन स्टैंडर्ड के सेफ्टी उपकरणों से लैस हैं। तेज हवा चलने या बिजली कड़कने की स्थिति में गंडोला की गति अपने-आप धीमी हो जाएगी।
यदि अचानक बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है, तो गंडोला बीच हवा में नहीं लटकेगा, बल्कि धीमी गति से सुरक्षित अपने नजदीकी स्टेशन पर पहुंच जाएगा।
एक नजर में वाराणसी का रोपवे प्रोजेक्ट
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कुल लागत: ₹800 करोड़
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ट्रैक की लंबाई: 3.75 किलोमीटर (कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक)
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केबल कारों की संख्या: 220 (गंडोला)
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यात्री क्षमता: एक बार में 4,400 यात्री सफर कर सकेंगे
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स्टेशनों की संख्या: कुल 5 स्टेशन (सभी पर काशी की संस्कृति और वास्तुकला की झलक दिखेगी)











