उत्तर प्रदेश – कानपुर कालिंदी रेल हादसा ! बड़ी साजिश का इशारा ?

“बीती रात कालिंदी एक्सप्रेस के ट्रैक पर हुई घटना की जांच के लिए एटीएस और आईबी की टीमों ने कानपुर में जांच का काम शुरु कर दिया है”
नई दिल्ली 09 / 09 / 2024 संतोष सेठ की रिपोर्ट
आईजी एटीएस एन चौधरी के अनुसार रविवार ट्रेन डीरेलमेंट के प्रयास को लेकर ट्रैक का निरीक्षण किया जा रहा है।
गौरतलब है कि कानपुर से भिवानी जा रही कालिंदी एक्सप्रेस रविवार रात बड़े हादसे से बच गयी। अनवरगंज रावतपुर से होकर कालिंदी एक्सप्रेस बर्राजपुर और बिल्हौर के बीच जब ट्रैक पर थी, तभी अचानक ट्रैक पर रखे गए गैस सिलिंडर से टकराने से तेज आवाज हुई।
लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दिया। सूचना मिलने पर आरपीएफ और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटना स्थल की जांच की।
जांच के दौरान रेलवे ट्रैक और झाड़ियों के पास से भरे हुए एलपीजी सिलिंडर सहित अन्य संवेदनशील वस्तुएं बरामद हुई।
रेलवे अधिकारी ने लोगों से शरारती तत्वों के बारे में सूचना देने अपील की
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कानपुर रेल ट्रैक पर हुई घटना को देखते हुए लोगों से अपील की है कि किसी भी शरारती तत्व की कोई हरकत पता चलने पर तुरंत पुलिस अथवा रेलवे स्टाफ को सूचित करें।
गोरखपुर में जारी बयान में उन्होंने कहा कि कानपुर में रेलवे ट्रैक पर मिले एलपीजी सिलेंडर और अन्य सामग्री की उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है।
साजिशकर्ताओं ने बर्राजपुर स्टेशन के आगे ट्रैक पर बिछी गिट्टी को हटाकर सिलिंडर गाड़ दिया था। इसके अलावा पास में पेट्रोल बम व बारूद भी रख दिया ताकि धमाके की चपेट में कई बोगियां आ जाएं और व्यापक पैमाने पर जनहानि हो।
इस साजिश के पीछे जांच एजेंसियों को आईएसआईएस के खुरासान माड्यूल का हाथ होने की आशंका है। एनआईए की पांच सदस्यीय टीम व एटीएस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
गनीमत रही कि ट्रेन से टकराने के बाद गैस से भरा सिलिंडर ट्रैक से छिटककर दूर जा गिरा। जिससे किसी तरह की कोई जनहानि नहीं हुई।
एक बड़ा हादसा होने से बच गया। इससे पहले शाम 5:12 बजे कासगंज-अनवरगंज एक्सप्रेस इसी रूट से गुजरी थी।
सिलिंडर टकराने के बाद फटने के बजाए ट्रैक से दूर जा गिरा
ट्रेन को डिरेल करने के लिए भरे गैस सिलिंडर को स्लीपर के बीच गिट्टी में धंसा दिया था, ताकि टकराने पर धमाके के साथ ट्रेन बेटरी हो जाए।
पर सिलिंडर ट्रेन के साथ 53 स्लीपर तक लुढ़कता गया और सात बार स्लीपरों से टकराकर पिचक गया। 32 मीटर तक घिसटने के बाद ट्रैक से 5.80 मीटर दूर जा गिरा।
ट्रैक पर सिलिंडर को इसलिए गाड़ा गया ताकि ट्रेन उससे टकरा कर पलट जाए अथवा सिलिंडर में ब्लास्ट हो जाए।
इसके अलावा पेट्रोल बम की सुतली को सिलिंडर की नोजल से जोड़ दिया गया था और ट्रैक के पास बारूद भी रख दिया गया।
मंशा यह थी सिलिंडर से टकराने के बाद अगर वह नहीं फटा तो रगड़ से चिंगारी पेट्रोल बम व बारूद तक पहुंच जाए।
सिलिंडर या पेट्रोल बम व विस्फोटक में धमाका हो जाता तो पूरी ट्रेन आग की चपेट में आ जाती, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि हो सकती थी।
मौके पर मिला विस्फोटक पदार्थ प्रथम दृष्टया जांच में अमोनियम नाइट्रेट बताया गया है। वहीं, एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट राहुल देव का कहना है कि घटनास्थल से मिला पीला पाउडर गंधक है।
कानपुर में कालिंदी एक्सप्रेस को डिरेल करने की साजिश के पीछे आतंकी संगठन आईएस के खुरासान माड्यूल पर जांच एजेंसियों को शक गहराता जा रहा है।
इसी वजह से आईबी, एनआईए, यूपी एटीएस समेत कई एजेंसियों ने कानपुर में डेरा डाल दिया है और साजिश से जुड़े हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है।











