अमेरिका का ईरान पर हमला: IRGC मिसाइल साइट्स तबाह, ट्रंप की चेतावनी
अमेरिका का ईरान पर बड़ा प्रहार: IRGC के ठिकानों और मिसाइल साइट्स को किया तबाह, ट्रंप की कड़ी चेतावनी”
वाशिंगटन/तेहरान: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में शांति और संघर्ष-विराम की कोशिशों के बीच एक बेहद तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।
अमेरिकी सेना ने सोमवार को दक्षिणी ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं।
‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से “आत्मरक्षा” (Self-Defense) में की गई है।
इस दौरान रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरानी जहाजों और मिसाइल लॉन्च साइटों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी सेना की ‘आत्मरक्षा’ वाली कार्रवाई
CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने एक बयान में कहा, “अमेरिकी सेना ने आज दक्षिणी ईरान में आत्मरक्षा में हमले किए हैं, ताकि हमारे सैनिकों को ईरानी सेनाओं से होने वाले खतरों से बचाया जा सके।”
हॉकिन्स ने बताया कि जिन ठिकानों को तबाह किया गया है, उनमें मिसाइल लॉन्च साइटें और वे ईरानी नावें शामिल थीं, जो कथित तौर पर इस रणनीतिक जलमार्ग में बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाने की कोशिश कर रही थीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि US सेंट्रल कमांड मौजूदा संघर्ष-विराम के दौरान संयम बरतते हुए भी अपनी सेनाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
क्यों किया गया यह भीषण हमला?
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई के पीछे दो मुख्य कारण थे:
बारूदी सुरंगें बिछाने की साजिश: होर्मुज जलडमरूमध्य में IRGC की दो नावें बारूदी सुरंगें बिछाते हुए देखी गई थीं।
अमेरिकी लड़ाकू विमानों पर खतरा: अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) साइट पर भी सटीक हमला किया, क्योंकि खुफिया रिपोर्ट थीं कि इस साइट से अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया जा रहा था।
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इन “रक्षात्मक हमलों” में ईरानी जहाज और मिसाइल साइट, दोनों पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
ईरानी मीडिया ने भी बंदर अब्बास, सीरिक और जास्क के पास तटों पर भारी धमाकों की आवाज़ें सुने जाने की सूचना दी है।
क्या टूट गया है संघर्ष-विराम?
इस बड़े हमले के बाद वैश्विक स्तर पर यह चिंता बढ़ गई थी कि क्या ईरान के साथ संघर्ष-विराम टूट गया है?
हालांकि, अमेरिकी रक्षा सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का मतलब कतई संघर्ष-विराम का टूटना नहीं है।
यह हमले बेहद ‘सीमित दायरे’ में केवल तात्कालिक खतरों को बेअसर करने के लिए किए गए थे और वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ये हमले “अभी के लिए समाप्त हो गए हैं।”
राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी चेतावनी: ‘परमाणु धूल अमेरिका को सौंपे ईरान’
सैन्य कार्रवाई के ठीक बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने कड़े रुख को एक बार फिर दोहराया है।
उन्होंने ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को तुरंत नष्ट करने की मांग की है।अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक पोस्ट में, राष्ट्रपति ट्रंप ने संवर्धित यूरेनियम को “परमाणु धूल” करार दिया।
उन्होंने लिखा, “संवर्धित यूरेनियम को या तो तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाए, ताकि उसे वापस लाकर नष्ट किया जा सके; या फिर—जो कि ज़्यादा बेहतर विकल्प है—ईरान के साथ मिलकर और आपसी तालमेल से, उसे उसी जगह पर या किसी अन्य स्वीकार्य स्थान पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट कर दिया जाए।”
इसके साथ ही, अमेरिका ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) के व्यापक विस्तार पर भी ज़ोर दे रहा है, ताकि भविष्य के क्षेत्रीय शांति ढांचे में तेहरान को भी शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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