यूपी: जल जीवन मिशन चरण 2 MoU पर हस्ताक्षर, 11 प्रमुख सुधार लागू होंगे
“ग्रामीण पेयजल शासन में संरचनात्मक सुधारों को बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) के दूसरे चरण के अंतर्गत सुधार से जुड़े समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए”
नई दिल्ली : [संतोष सेठ की रिपोर्ट , The Politics Again]
यह समझौता ज्ञापन मिशन के सुधार-उन्मुख कार्यान्वयन ढांचे में उत्तर प्रदेश के औपचारिक प्रवेश का प्रतीक है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को मंजूरी दी थी।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना और उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे।
श्रीमती स्वाति मीणा नाइक, संयुक्त सचिव (जल), पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय, और श्री अनुराग श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, नमामि गंगे और ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए और आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के सचिव श्री अशोक के. के. मीणा, अपर सचिव और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर और राज्य जल और स्वच्छता मिशन, उत्तर प्रदेश के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
नया चरण: संरचनात्मक सुधार और दीर्घकालिक स्थिरता
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन का दूसरा चरण अब सुनिश्चित सेवा वितरण, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा, “यह समझौता ज्ञापन जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उत्तर प्रदेश के विशाल भौगोलिक क्षेत्र और बड़े लाभार्थी आधार को देखते हुए, मिशन के तहत पर्याप्त वित्तीय संसाधन देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।
सार्वभौमिक घरेलू नल से जल कवरेज प्राप्त करने के लिए इन निधियों का प्रभावी और समय पर उपयोग महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने केंद्र सरकार की भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और गुणवत्ता चूक के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को भी दोहराया।
महिलाओं और स्वास्थ्य पर परिवर्तनकारी प्रभाव
श्री पाटिल ने एसबीआई रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि जल जीवन मिशन ने लगभग 9 करोड़ महिलाओं को पानी लाने के दैनिक कठिन परिश्रम से राहत दी है, जिससे वे कृषि, आजीविका और उत्पादक गतिविधियों के लिए अधिक समय दे पा रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन के अनुसार, घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल तक सार्वभौमिक पहुंच में महिलाओं के लिए हर दिन लगभग साढ़े 5 करोड़ घंटे बचाने और डायरिया रोगों के कारण सालाना लगभग 4 लाख मौतों को रोकने की क्षमता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जल जीवन मिशन केवल एक योजना नहीं है बल्कि एक जीवन को प्रभावित करने वाला मिशन है।
यह विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए स्वास्थ्य, गरिमा और जीवन की गुणवत्ता में बुनियादी सुधार ला रहा है।”
उन्होंने हर गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और लोगों की शिकायतों का तुरंत समाधान करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री योगी का आभार और दृष्टिकोण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि खराब पानी की गुणवत्ता के कारण इंसेफलाइटिस जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा हो गई थीं, लेकिन सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता तक बेहतर पहुंच ने अब इन क्षेत्रों में मृत्यु दर को शून्य के करीब ला दिया है।
उन्होंने ग्रामीण महिलाओं की कठिनाइयों को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन को एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार अब परिसंपत्तियों के उचित संचालन और रखरखाव के साथ नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।”
उन्होंने बुंदेलखंड, विंध्य क्षेत्र और गंगा-यमुना के किनारे फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल कवरेज के विस्तार का भी उल्लेख किया।
एमओयू की प्रमुख बातें: 11 संरचनात्मक सुधार
यह समझौता ज्ञापन 11 प्रमुख संरचनात्मक सुधार क्षेत्रों के कार्यान्वयन को अनिवार्य करता है, जिसमें शासन संरचना, सेवा उपयोगिता ढांचा, तकनीकी अनुपालन, नागरिक-केंद्रित जल गुणवत्ता शासन, स्रोत स्थिरता, डिजिटल डेटा गवर्नेंस, जनभागीदारी, क्षमता निर्माण, मानव संसाधन और कौशल, परिचालन और वित्तीय स्थिरता, और अनुसंधान और नवाचार शामिल हैं।
इसमें ‘जल अर्पण’ प्रक्रिया के माध्यम से पूर्ण योजनाओं को ग्राम पंचायतों को औपचारिक रूप से सौंपने और ‘जल सेवा आंकलन’ का भी प्रावधान है।
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