केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के सेमीकंडक्टर उद्योग को साइबर हमलों, फर्जी खबरों और भौतिक व्यवधानों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी है; सरकार ने चिप इकोसिस्टम के लिए 'सेमीकॉन 2.0' को दी है मंजूरी।
सेमीकंडक्टर हब बनने की राह पर भारत: अश्विनी वैष्णव की चेतावनी- साइबर हमले, दुष्प्रचार और भौतिक व्यवधानों से रहना होगा सतर्क”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन डेस्क : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत का तेजी से उभरता सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Semiconductor Ecosystem) अब वैश्विक पटल पर मजबूती से अपनी छाप छोड़ रहा है।
हालांकि, भारत की यह तकनीकी छलांग उन ताकतों की आंखों में खटकने लगी है, जिन्हें देश का रणनीतिक और आर्थिक उदय रास नहीं आ रहा।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि जिस तरह भारत को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने से रोकने की कोशिशें की गई थीं,
वैसे ही अब सेमीकंडक्टर सेक्टर की रफ्तार थामने के लिए भी साइबर हमले, फर्जी खबरें (Fake News) और भौतिक व्यवधान जैसी चालें चली जा सकती हैं।
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एनडीटीवी (NDTV) से बातचीत में इस संभावित खतरे को एप्पल के भारत में आईफोन (iPhone) निर्माण के शुरुआती दौर के उदाहरण से समझाया।
उन्होंने बताया कि जब एप्पल ने भारत में अपना उत्पादन शुरू किया था, तब उसे बाधित करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए गए थे।
कुछ उत्पादन इकाइयों में ‘फूड पॉइजनिंग’ (Food Poisoning) की घटनाएं सामने आईं।साजिशन बिजली के तार काटे गए।
फर्जी खबरें फैलाई गईं; जैसे रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया, जिसमें झूठा दावा किया गया था कि उत्पादन इकाइयों में विवाहित महिलाओं को काम करने की अनुमति नहीं है।
वैष्णव ने इन घटनाओं को भारत की वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह में रोड़ा अटकाने की सोची-समझी साजिश करार दिया।
वैष्णव के अनुसार, दुनिया ने भारत के चिप निर्माण क्षेत्र में प्रवेश को नोटिस किया है। जैसे-जैसे भारत की क्षमता बढ़ेगी, इसका विरोध भी सामने आएगा।
उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को आगाह किया है कि उन्हें साइबर हमलों, दुष्प्रचार और आपूर्ति-श्रृंखला में भौतिक व्यवधानों जैसे संभावित जोखिमों से निपटने के लिए पहले से पूरी तरह सतर्क और तैयार रहना होगा।
आधुनिक अर्थव्यवस्था और रक्षा प्रणालियों से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तक, आज सबकुछ चिप्स (Chips) पर निर्भर है।
अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया के दबदबे वाले इस क्षेत्र में चीन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत ने भी आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं:
Semicon India: 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित इस वैश्विक आयोजन में 52 देशों की लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने हिस्सा लिया और 56 रणनीतिक समझौतों (MoUs) पर मुहर लगी।
Semicon 2.0: मोदी सरकार ने इस योजना के तहत जुलाई में ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दी है,
जिसमें सिर्फ असेंबली ही नहीं, बल्कि चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन और रिसर्च (पूरी वैल्यू चेन) पर जोर दिया जा रहा है।
वाणिज्यिक उत्पादन: 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं (₹1.64 लाख करोड़ का निवेश) को मंजूरी मिल चुकी है।
माइक्रोन (Micron), केनेस (Kaynes) और सीजी सेमी (CG Semi) समेत 5 परियोजनाएं वाणिज्यिक उत्पादन के स्तर तक पहुंच चुकी हैं।
Applied Materials: 2035 तक भारत में $5 अरब के निवेश की योजना।
Lam Research: ₹10,000 करोड़ का प्रस्तावित निवेश।
Tata Electronics: धोलेरा (गुजरात) में 363 एकड़ का वेंडर पार्क (Vendor Park)।
Fujifilm: ₹800 करोड़ का सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स प्लांट।
भारत के सामने सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एक विशाल अवसर है, लेकिन चुनौतियां और विदेशी साज़िशों का जोखिम भी उतना ही बड़ा है।
सरकार का संदेश साफ है—भारत अब पीछे हटने वाला नहीं है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि देश में आने वाली वैश्विक पूंजी और तकनीक को साइबर और भौतिक खतरों से सुरक्षित रखते हुए, भारत कितनी जल्दी अपना एक टिकाऊ और अजेय घरेलू चिप इकोसिस्टम तैयार कर पाता है।
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