हिमाचल : शिमला की प्यास बुझी; 8 साल बाद पहुंचा सतलुज का पानी
8 साल का इंतजार खत्म: शिमला पहुंचा सतलुज नदी का पानी, ₹550 करोड़ के प्रोजेक्ट से हमेशा के लिए मिटेगी पानी की किल्लत
शिमला: द पॉलिटिक्स अगेन
हिमाचल प्रदेश की राजधानी और प्रमुख पर्यटन स्थल शिमला के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है।
आठ साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मंगलवार (17 मार्च) को सतलुज नदी का पानी शिमला पहुंच गया है।
करीब 60 किलोमीटर दूर सुन्नी के शकरोड़ी से विशाल पाइपों के जरिए यह पानी राजधानी लाया गया है।
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब शिमलावासियों और यहां आने वाले पर्यटकों को गर्मियों में पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
संजौली में हुआ जल आगमन का भव्य स्वागत
सतलुज का पानी शिमला पहुंचने की खुशी में संजौली में एक विशेष ‘जल आगमन कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया।
इस मौके पर स्थानीय विधायक हरीश जनारथा, मेयर सुरेंद्र चौहान, डिप्टी मेयर उमा कौशल और एसजेपीएनएल (SJPNL) के एमडी वीरेंद्र ठाकुर विशेष रूप से मौजूद रहे।
वर्ल्ड बैंक द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना पर लगभग 550 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। हालांकि कुछ काम अभी बाकी हैं, लेकिन पानी को शिमला तक पहुंचाना इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती थी, जो पूरी हो गई है।
पीलिया और सूखे के डरावने अतीत से मिलेगी मुक्ति
शिमला का पानी को लेकर एक दर्दनाक अतीत रहा है।
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2016 का पीलिया कहर: पहले शहर को अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई होती थी। 2016 में सीवरेज का पानी पीने के पानी में मिल जाने से पूरे शहर में भयंकर पीलिया फैल गया था। इसमें 1600 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे और करीब 30 लोगों की जान चली गई थी।
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2018 का भयंकर सूखा: 2018 में शिमला ने ऐसा सूखा देखा कि शहर में त्राही-त्राही मच गई। टैंकरों से भी पानी पहुंचाना मुश्किल हो गया था।
कैसे शुरू हुई थी यह परियोजना?
2018 के जल संकट को देखते हुए तत्कालीन भाजपा सरकार ने सतलुज का पानी शिमला लाने का प्लान बनाया था।
उसी साल बीओडी की बैठक में शकरोड़ी परियोजना को मंजूरी दी गई। 2020 में इसे 421 करोड़ रुपये के बजट के साथ रिवाइज किया गया और इसका शिलान्यास तत्कालीन जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने किया था।
कई बदलावों के बाद अब इसका बजट 500 करोड़ के पार पहुंच गया और अंततः शहरवासियों का सपना सच हो गया।












