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जौनपुर में चाइनीज मांझे पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: बेचने या रखने पर होगी 7 साल की जेल

“पतंगबाजी के शौकीनों और दुकानदारों के लिए जौनपुर जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त फरमान जारी किया है”

जौनपुर | The Politics Again

जिले में जानलेवा चाइनीज मांझे (Chinese Manjha) के निर्माण, भंडारण, उपयोग और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

जिलाधिकारी (DM) डॉ. दिनेश चंद्र ने स्पष्ट किया है कि इस प्रतिबंध का उल्लंघन करना अब भारी पड़ेगा, जिसमें 7 साल तक की जेल और लाखों का जुर्माना शामिल है।

NGT के आदेश का हवाला, लगेगा कड़ा जुर्माना

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला वृक्षारोपण, पर्यावरण और गंगा समिति की बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों का सख्ती से पालन करने की बात कही।

DM ने चेतावनी देते हुए कहा,

“पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-5 और धारा-15 के तहत, यदि कोई व्यक्ति चाइनीज मांझे का निर्माण, बिक्री या भंडारण करता पाया जाता है, तो उसे 5 वर्ष तक का कारावास या 1 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा।”

प्रशासन ने नियमों को और सख्त करते हुए कहा है कि यदि उल्लंघन जारी रहता है, तो अपराधी को प्रतिदिन 5000 रुपए का अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।

वहीं, यदि यह उल्लंघन एक वर्ष से अधिक समय तक जारी रहता है, तो सजा बढ़ाकर 7 वर्ष तक का कारावास किया जा सकता है।

नगर निकायों को ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाने के निर्देश

जिलाधिकारी ने जिले के सभी अधिशासी अधिकारियों (EOs) को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तत्काल विशेष अभियान चलाएं।

उन्होंने कहा कि दुकानों और गोदामों की जांच की जाए और जहां भी चाइनीज मांझा मिले, उसे तत्काल नष्ट किया जाए।

DM ने साफ शब्दों में कहा, “किसी भी निकाय क्षेत्र में मांझे का भंडारण या बिक्री पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”

पौधारोपण रिपोर्ट पर भी सख्ती

बैठक में केवल मांझे पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने उन विभागों को कड़ी फटकार लगाई जिन्होंने वृक्षारोपण के बाद पौधों के जीवित रहने (Survival Percentage) की रिपोर्ट नहीं दी है।

ऐसे विभागों को दो दिनों के भीतर रिपोर्ट जमा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।इसके अलावा पौधों की सुरक्षा, सिंचाई, जीपीएस इनेबल्ड व्हीकल से निगरानी और प्लास्टिक व चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए।

जौनपुर प्रशासन का यह रुख साफ करता है कि अब पर्यावरण और आम जनमानस की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

Santosh SETH

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