काशी में शिव विवाह का उल्लास: बाबा विश्वनाथ को आज लगेगी शगुन की हल्दी, नासिक से आया है खास चढ़ावा

“धर्म की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का उत्सव शुरू हो चुका है। यहाँ शिव केवल देवता नहीं, बल्कि काशीवासियों के लिए दामाद और घर के सदस्य जैसे हैं”

वाराणसी (काशी): THE POLITICS AGAIN : वरुण यादव की रिपोर्ट 

इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए, महाशिवरात्रि से पूर्व बाबा विश्वनाथ के विवाह की रस्में शुक्रवार (13 फरवरी) से औपचारिक रूप से शुरू हो रही हैं।

आज बाबा को शगुन की हल्दी लगाई जाएगी, जिसके साथ ही पूरी काशी ‘शिवमय’ हो जाएगी।

बांसफाटक से टेढ़ीनीम तक निकलेगी हल्दी यात्रा

परंपरा के अनुसार, बांसफाटक स्थित श्रीयंत्र पीठम् (शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज का आवास) से गाजे-बाजे के साथ हल्दी की पारंपरिक यात्रा शुरू होगी। यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास पर पहुंचेगी।

  • विशेष रस्म: यहाँ बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा (पांच मुख वाली मूर्ति) पर विधिवत हल्दी अर्पित की जाएगी।

  • नासिक से आई हल्दी: शीतला मंदिर के उपमहंत अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि इस बार बाबा के लिए हल्दी विशेष रूप से नासिक (महाराष्ट्र) से मंगाई गई है, जिसे सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत परिवार की ओर से भेजा गया है।

बाबा के ‘ससुराल’ से आएगा तिलक

काशी में भगवान शिव का ससुराल सारंगनाथ माना जाता है। शुक्रवार को बाबा के ससुराल पक्ष के लोग भी पूरी तैयारी के साथ आएंगे।

  • शोभायात्रा: सारंगनाथ मंदिर से शाम 4 बजे हल्दी और तिलक की सामग्री लेकर एक भव्य शोभायात्रा निकलेगी।

  • तिलहरू: सारंगनाथ सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ के अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने बताया कि भक्त माता गौरा के गण (तिलहरू) के रूप में बाबा को तिलक चढ़ाने जाएंगे।

11 वैदिक ब्राह्मण करेंगे शृंगार और पूजन

महंत परिवार की वरिष्ठ सदस्य मोहिनी देवी के सानिध्य में और पं. सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में 11 वैदिक ब्राह्मण बाबा की प्रतिमा का विशेष शृंगार और पूजन करेंगे।

  • दूल्हे सा रूप: आयोजक वाचस्पति तिवारी के अनुसार, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का दूल्हे के रूप में शृंगार होगा, जिसकी छवि अलौकिक होगी।

भजन संध्या और नृत्य की बहेगी बयार

हल्दी की रस्म के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा। शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र ने बताया कि:

  • भजन: पागल बाबा के भजनों से माहौल भक्तिमय होगा।

  • नृत्य: अदिति शर्मा और सिद्धि कौस्तुभ द्वारा नृत्यांजलि प्रस्तुत की जाएगी।

आगे का कार्यक्रम

  • 13 फरवरी (शुक्रवार): हल्दी की रस्म।

  • 14 फरवरी (शनिवार): सारंगनाथ मंदिर में मेहंदी की रस्म और संगीत संध्या।

  • महाशिवरात्रि: बाबा का विवाह और विशाल भंडारा। इसके बाद माता गौरा के गौना (विदाई) की तैयारी शुरू होगी।

Santosh SETH

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