टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा का निधन, 86 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

“दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने 86 साल की आयु में अंतिम सांस ली। उनका निधन मुंबई के अस्पताल में हुआ। टाटा के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक प्रकट किया। उन्होंने टाटा को दूरदर्शी सोच का व्यक्ति बताया और अपनी संवेदना प्रकट करते हुए असाधारण इंसान करार दिया”

महाराष्ट्र 10 / 10 / 2024 वरुण यादव की रिपोर्ट 

देश के उद्योग जगत के सबसे नायाब ‘रतन’ यानी रतन टाटा नहीं रहे। उम्र से जुड़ी बीमारी के बाद 86 वर्ष की उम्र में उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली।

सोमवार को वे स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे। बाद में उन्होंने ही आईसीयू में भर्ती होने के दावों का खंडन कर दिया था। हालांकि, बुधवार को उन्हें एक बार फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका। रतन टाटा अपनी सादगी और सरल स्वभाव की वजह से जाने जाते थे।

उदारीकरण के दौर के बाद टाटा समूह आज जिस ऊंचाइयों पर है, उसे यहां तक पहुंचाने में रतन टाटा बहुत बड़ा योगदान है। टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को हुआ था। वे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के दत्तक पोते नवल टाटा के पुत्र थे।

समूह की तरफ से टाटा संस के चेयरमैन ने बयान जारी किया

टाटा के निधन पर इस औद्योगिक घराने के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा, ‘हम रतन नवल टाटा को बहुत ही गहरे दुख के साथ विदाई दे रहे हैं। वे वास्तव में असाधारण शख्सियत थे।

चंद्रशेखरन ने कहा, ‘टाटा समूह के लिए, रतन टाटा एक अध्यक्ष से कहीं बढ़कर थे। मेरे लिए, वे एक गुरु, मार्गदर्शक और मित्र थे। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से प्रेरित किया।

उत्कृष्टता, अखंडता और नवाचार के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ, उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने अपने नैतिक मानदंडों के प्रति हमेशा सच्चे रहते हुए वैश्विक स्तर पर विस्तार किया। 

टाटा की पहल ने गहरी छाप छोड़ी, आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा लाभ

चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा के परोपकार और समाज के विकास के प्रति समर्पण ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा तक, उनकी पहल ने एक गहरी छाप छोड़ी है जो आने वाली पीढ़ियों को लाभान्वित करेगी।

तमाम कार्यों को सुदृढ़ बनाने में टाटा के साथ हुई हर व्यक्तिगत बातचीत उनकी वास्तविक विनम्रता की मिसाल है। टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन ने कहा, ‘पूरे टाटा परिवार की ओर से, मैं उनके प्रियजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।

उनकी विरासत हमें प्रेरित करती रहेगी क्योंकि हम उन सिद्धांतों को बनाए रखने का प्रयास करते हैं जिनका उन्होंने इतने जुनून से समर्थन किया।’

इससे पहले सोमवार को खबरें आई थीं कि टाटा संस के मानद चेयरमैन को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दावा किया गया कि उनका ब्लड प्रेशर अचानक काफी गिर गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और आईसीयू में रखा गया। हालांकि, कुछ ही देर बाद खुद रतन टाटा ने अपने ही सोशल मीडिया हैंडल के जरिए इन अफवाहों को निराधार करार दिया। 

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से की पढ़ाई

रतन टाटा ने स्कूली पढ़ाई-लिखाई मुंबई से की। इसके बाद वे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी चले गए, जहां से उन्होंने आर्किटेक्चर में बीएस किया। रतन टाटा 1961-62 में टाटा ग्रुप जुड़े थे।

इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट प्रोग्राम से प्रबंधन की पढ़ाई की। 1991 में वे टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने। साल 2012 में रिटायर हुए थे।

भारत में पहली बार पूर्ण रूप से बनी कार का उत्पादन शुरू करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। इस पहली पूर्ण स्वेदश निर्मित कार का नाम था टाटा इंडिका।

दुनिया की सबसे सस्ती कार टाटा नैनो बनाने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम है। उनके नेतृत्व में ही टाटा समूह ने लैंड रोवर और जगुआर का अधिग्रहण कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी थी। उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था। 

टाटा मोटर्स, जगुआर लैंड रोवर की कामयाबी के पीछे था रतन टाटा का हाथ

रतन टाटा किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। बेशुमार दौलत के मालिक होने के बावजूद वो दिखावे से दूर एक बहुत सादगी भरी जिंदगी जीते थे। वे Tata Sons (टाटा संस) के मानद चेयरमैन और टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रहे।

एक प्रशिक्षित पायलट रहे रतन टाटा को वाहनों का भी शौक था। उनके पास एक प्रभावशाली कार कलेक्शन था। जिसमें ‘लखटकिया कार’ टाटा नैनो से लेकर बेशकीमती फेरारी कैलिफोर्निया जैसी कारें शामिल थीं।

जबकि ज्यादातर मशहूर लोगों के पास सिर्फ बेहतरीन कारें होती हैं। वहीं, रतन टाटा एक ऐसी शख्सियत हैं जिनके पास Tata Motors (टाटा मोटर्स), Jaguar (जगुआर) और Land Rover (लैंड रोवर) जैसे कई कार ब्रांड हैं। रतन टाटा की तरह इस सूची में शीर्ष पर आना आसान नहीं है। 

Tata Motors

देश के तीन सबसे बड़े ऑटोमोबाइल ब्रांड्स में शुमार टाटा मोटर्स में रतन टाटा की भूमिका बहुत अहम रही है। उन्होंने दुनिया की सबसे सस्ती कार टाटा नैनो लॉन्च करके टाटा मोटर्स को दुनिया के नक्शे पर ला खड़ा किया।
 
उनका लक्ष्य टाटा नैनो को भारत में हर घर में मशहूर बनाना था। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। लेकिन इसने अपनी कीमत के साथ दुनिया भर में धूम मचा दी।
 
उन्होंने टाटा इंडिका के साथ छोटी कारों में डीजल टेक्नोलॉजी की शुरुआत में भी अहम भूमिका निभाई। टाटा मोटर्स को आज भारतीय बाजार में जो सफलता मिली है, उसकी नींव किसी और ने नहीं बल्कि रतन टाटा ने रखी।
 
Jaguar Land Rover
2008 में टाटा मोटर्स ने फोर्ड से जगुआर और लैंड रोवर के अधिग्रहण के लिए Jaguar Land Rover (जगुआर लैंड रोवर) की स्थापना की। यह अधिग्रहण रतन टाटा के नेतृत्व में पूरा हुआ।
 
यह वह घटना थी जिसने जगुआर और लैंड रोवर दोनों के लिए चीजें बदल दीं। क्योंकि ये दोनों कार ब्रांड आगे बढ़ने के लिए संघर्ष कर रहे थे। टाटा मोटर्स द्वारा अधिग्रहण के बाद इन दोनों ब्रांडों ने वैश्विक बाजार में अपने लिए चीजें बदल दीं। 
जगुआर एक आला लग्जरी और स्पोर्ट्स कार ब्रांड बन गया है। और लैंड रोवर को उस गौरव के साथ पुनर्जीवित किया गया, जो ब्रिटिश साम्राज्य को शर्मसार कर सकता है।
 
ब्रांड की आधुनिक रेंज रोवर रेंज ने अपने लिए एक जगह बना ली है और यह लोकप्रिय संस्कृति का एक हिस्सा भी बन गया है। और फिल्मों, संगीत वीडियो और टेलीविजन सीरीज में केंद्र पर आ गया है। यहां तक कि भारतीय प्रधानमंत्री भी रेंज रोवर्स के काफिले का इस्तेमाल करते हैं।
 
ऑटोमोटिव हॉल ऑफ फेम
रतन टाटा को ऑटोमोटिव उद्योग में उनके योगदान और जगुआर लैंड रोवर के कायाकल्प के लिए ऑटोमोटिव हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है।
 
टाटा मोटर्स के संस्थापक को 23 जुलाई, 2015 को अमेरिका के डेट्रायट में आयोजित एक पुरस्कार समारोह में यह सम्मान दिया गया था।

ऑटोमोटिव हॉल ऑफ फेम में शामिल होने का अधिकार उन लोगों को दिया जाता है, जिनका “ऑटोमोटिव उद्योग में सकारात्मक असर” रहा है और जिन्होंने “ऑटोमोटिव उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।”

भारतीय और वैश्विक ऑटोमोटिव उद्योग रतन टाटा के कारण आगे बढ़ा है। और ऑटोमोबाइल की दुनिया में उनके योगदान को हमेशा संजो कर रखा जाएगा।