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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: कोर्ट के लाइव वीडियो शेयर और एडिट करने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: सोशल मीडिया पर कोर्ट की लाइव-स्ट्रीम के वीडियो शेयर और एडिट करने पर रोक, मोनेटाइजेशन भी बैन”

नई दिल्ली: अगर आप भी यूट्यूब, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की लाइव-स्ट्रीम (Live-Stream) की गई कार्यवाही के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स, रील्स या शॉर्ट्स देखते या शेयर करते हैं, तो अब आपको सावधान होने की जरूरत है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने एक अहम आदेश जारी करते हुए अदालत की कार्यवाही के अनधिकृत इस्तेमाल और उससे कमाई (Monetization) करने पर सख्त पाबंदी लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति बिना पूर्व अनुमति के अदालत की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट, रीपोस्ट, अपलोड या शेयर नहीं कर सकेगा।

वीडियो से कमाई (Monetization) करने वालों को बड़ा झटका

आजकल कई यूट्यूब चैनल्स और सोशल मीडिया पेज अदालती बहसों के वीडियो डालकर लाखों व्यूज बटोरते हैं और उससे पैसे कमाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि लाइव-स्ट्रीम की गई कार्यवाही के वीडियो या ऑडियो का इस्तेमाल ‘मोनेटाइजेशन’ के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

अगर किसी को इन वीडियो का इस्तेमाल करना है, तो उसे पहले संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल या सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल से आधिकारिक मंजूरी लेनी होगी।

क्लिप काटने और एडिटिंग पर भी लगी रोक

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि:

  • लाइव-स्ट्रीम वीडियो से कोई छोटा क्लिप निकालना (Short Clips) अब गैरकानूनी होगा।

  • वीडियो या ऑडियो में किसी भी तरह की एडिटिंग करना या उसमें बदलाव करना प्रतिबंधित है।

  • वीडियो को उसके मूल संदर्भ से हटाकर अलग तरीके से (Misrepresentation) पेश नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई यह रोक?

अदालत का मानना है कि सोशल मीडिया पर अक्सर कोर्ट की कार्यवाही के छोटे और अधूरे हिस्से काटकर अपलोड कर दिए जाते हैं।

इस तरह के ‘एडिटेड’ और आधे-अधूरे वीडियो आम जनता के बीच गलतफहमी फैला सकते हैं और इसका सीधा असर न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा पर पड़ता है। इसी गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

न्यूज चैनलों और मीडिया रिपोर्टिंग पर नहीं पड़ेगा असर

इस कड़े आदेश के बीच सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसका असर समाचारों की ‘रिपोर्टिंग’ पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।

मीडिया संस्थान और पत्रकार पहले की तरह ही अदालत की कार्यवाही से जुड़ी खबरें प्रकाशित और प्रसारित करने के लिए स्वतंत्र हैं।

यह रोक केवल कोर्ट की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत इस्तेमाल, छेड़छाड़ और उससे कमाई करने वालों पर लागू होगी।

केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है, जिसमें मांग की गई थी कि कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करके कमाई करने वालों पर लगाम लगाई जाए।

अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है।

अब सरकारों को कोर्ट को बताना होगा कि इस तरह के अनधिकृत डिजिटल इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या तकनीकी और कानूनी व्यवस्था की जा सकती है।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि वे इस नए आदेश को अपनी आधिकारिक वेबसाइट्स पर तुरंत जारी करें।

Santosh SETH

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