भारतीय इतिहास को प्रभावित करने में जलवायु की भूमिका पर अध्ययन

“पिछले 2000 वर्षों में भारतीय उपमहाद्वीप में मानव इतिहास को आकार देने में जलवायु-संचालित कृषि परिवर्तनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।  यह हाल के अध्ययन से पता चलता है, जिसमें पराग और मल्टीप्रॉक्सी अध्ययनों की मदद से पैलियोक्लाइमेट रिकॉर्ड से गंगा तट पर वनस्पति पैटर्न का पता लगाया गया है। यह शोध भविष्य के प्रभावों की बेहतर भविष्यवाणी करने के लिए जलवायु पैटर्न को समझने के महत्व को रेखांकित करता है”

नई दिल्ली 06 / 11 / 2024 (संतोष सेठ की रिपोर्ट )

मध्य गंगा मैदान (सीजीपी) में पिछलें होलोसीन (लगभग 2,500 वर्ष) के लिए पैलियोक्लाइमेट रिकॉर्ड की अत्यधिक कमी है, जो इस क्षेत्र में पिछले जलवायु पैटर्न को समझने में एक महत्वपूर्ण शोध अंतराल को उजागर करता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान बीएसआईपी के वैज्ञानिकों ने ऐतिहासिक जलवायु गतिशीलता को बेहतर ढंग से समझने के लिए विशेष रूप से भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून (आईएसएम) के संबंध मेंपैलियोक्लाइमैटिक तरीकों की खोज की।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में सरसापुखरा झील से निकाले गए तलछट कोर से पराग (जो मिट्टी और तलछट में माइक्रोफॉसिल के रूप में जीवित रहता है) और अन्य मल्टीप्रॉक्सी विश्लेषण का उपयोग करते हुए, जिसे अर्थ सिस्टम पेलियोक्लाइमेट सिमुलेशन (ईएसपीएस) मॉडल द्वारा पूरक किया गया है।

शोधकर्ताओं ने पिछले 2000 वर्षों के ऐतिहासिक भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून (आईएसएम) पैटर्न का पुनर्निर्माण किया, जिसमें भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाओं के साथ जलवायु परिवर्तनों को सहसंबंधित किया गया।

उन्होंने पाया कि बारी-बारी से गर्म और ठंडे एपिसोड (रोमन वार्म पीरियड, डार्क एज कोल्ड पीरियड, मीडियवल वार्म पीरियड और लिटिल आइस एज) ने वनस्पति पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया। 

इससे मानव पलायन को मजबूर हुआ और संभावित रूप से गुप्त, गुर्जर प्रतिहार और चोल जैसे प्रमुख भारतीय राजवंशों के उत्थान और पतन में योगदान दिया। यह अध्ययन कैटेना पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

 यह बदलती जलवायु के लिए अधिक उपयुक्त फसलों की पहचान करके,  उत्पादकता बनाए रखने और सकल घरेलू उत्पाद की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कृषि प्रथाओं को अनुकूल बनाया जा सकता है।

यह दृष्टिकोण कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे भविष्य में खाद्य सुरक्षा और आर्थिक मजबूती सुनिश्चित हो सकेगा।

Santosh SETH

Recent Posts

रबी बुआई और किसानों की मदद पर शिवराज सिंह चौहान के बड़े निर्देश

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, बोले- 'संकट में किसानों के…

17 hours ago

जौनपुर रोजगार मेला: BRP इंटर कॉलेज में 1047 युवाओं को मिली नौकरी

जौनपुर: BRP इंटर कॉलेज के 'वृहद रोजगार मेले' में 1047 युवाओं की चमकी किस्मत, 50…

17 hours ago

जौनपुर: रबी फसल के लिए बीजशोधन क्यों जरूरी? जानिए अहम जानकारी

जौनपुर: रबी फसल में बंपर पैदावार के लिए 'भूमिशोधन और बीजशोधन' जरूरी, कृषि विभाग ने…

17 hours ago

जौनपुर: पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग की बड़ी बैठक

जौनपुर: आगामी पंचायत चुनाव को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग का महामंथन, जनप्रतिनिधियों से लिया OBC…

17 hours ago

जौनपुर: धनतेरस-दिवाली से पहले DM के सख्त निर्देश, समय से दें वेतन

जौनपुर: धनतेरस-दिवाली से पहले DM का बड़ा आदेश, 'सभी कर्मचारियों को समय से दें वेतन';…

17 hours ago

जौनपुर: ‘शुद्ध ही शुभ है’ अभियान में छापा, 98kg हल्दी जब्त, 50kg मिठाई नष्ट

जौनपुर में खाद्य विभाग का बड़ा एक्शन: 'शुद्ध ही शुभ है' अभियान के तहत 98…

17 hours ago