विशेष रिपोर्ट : जौनपुर की साधना खरवार बनीं मशरूम उत्पादन की मिसाल
जौनपुर की साधना खरवार बनीं ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मिसाल: 1000 रुपये से शुरू की थी मशरूम की खेती, आज कमा रहीं लाखों और दे रहीं फ्री ट्रेनिंग”
जौनपुर/बक्सा: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
ग्रामीण क्षेत्रों में अगर दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नारी सशक्तिकरण’ की एक ऐसी ही जीती-जागती मिसाल पेश की है जौनपुर जिले के विकासखंड बक्सा के नरी ग्राम सभा की रहने वाली साधना खरवार ने।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े ‘जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह’ का संचालन करने वाली साधना आज जिले में मशरूम उत्पादन की ‘नंबर वन ट्रेनर’ बन गई हैं।
महज 1000 रुपये से शुरुआत, आज पैदा कर रहीं 20 क्विंटल मशरूम
साधना खरवार (पत्नी जितेंद्र खरवार) ने अपने इस सफर की शुरुआत मात्र 1000 रुपये की छोटी सी पूंजी से की थी। अपनी लगन और मेहनत के दम पर आज वे हर सीजन में 18 से 20 क्विंटल मशरूम का बंपर उत्पादन कर रही हैं।
इस व्यवसाय से वे प्रति सीजन 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रही हैं। साधना के फार्म पर मुख्य रूप से 5 प्रकार के उन्नत मशरूम उगाए जाते हैं—ऑयस्टर, बटन, मिल्की, प्रोटोविला और ऑयस्टर किंग।
खास बात यह है कि उनके यहां उत्पादित पौष्टिक मशरूम की सप्लाई अब सरकारी विद्यालयों के ‘मिड-डे मील’ (Mid-Day Meal) में भी की जा रही है, जो ग्रामीण बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने में मददगार है।
21 ब्लॉकों के लोगों को दे रही हैं निःशुल्क ट्रेनिंग
साधना अब केवल अपने तक सीमित नहीं हैं; वे जौनपुर जनपद के सभी 21 ब्लॉकों से आने वाले लोगों को मशरूम की खेती की निःशुल्क (Free) ट्रेनिंग दे रही हैं, ताकि अन्य लोग भी अपनी आजीविका चला सकें।
हाल ही के एक प्रशिक्षण सत्र में विशाल चौहान, विकास सिंह, अमित सिंह, आशीष सिंह, इब्राहिम सिद्दीकी, सुमित प्रजापति, अनिल निषाद, विनय मौर्य, अभिषेक प्रजापति और अरुण यादव समेत कई युवाओं ने उनसे मशरूम उगाने की बारीकियां सीखीं।
क्या है मशरूम उगाने की विधि?
ट्रेनिंग के दौरान साधना बताती हैं कि मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया वैज्ञानिक लेकिन सरल है। सबसे पहले भूसे को 12 से 14 घंटे तक पानी में भिगोया जाता है।
इसके बाद सुबह इसे बाहर निकालकर रख दिया जाता है। जब भूसे की 70% नमी खत्म हो जाती है और केवल 30% नमी बचती है, तब इसे प्लास्टिक के बैग में भरकर उसमें मशरूम के बीज मिला दिए जाते हैं।
लगभग 20 से 25 दिन इस बैग को सुरक्षित रखने के बाद ताजा और उत्तम गुणवत्ता का मशरूम तैयार हो जाता है।
पूर्व डीएम और कृषि वैज्ञानिकों से मिला सम्मान व प्रेरणा
साधना की इस अभूतपूर्व सफलता को प्रशासन ने भी सराहा है। जौनपुर के तत्कालीन डीएम मनीष वर्मा और सीडीओ अनुपम शुक्ला ने उनके फार्म पर आकर मशरूम उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें सम्मानित किया था।
इसके अलावा, कृषि विज्ञान केंद्र बक्सा द्वारा उन्हें 7000 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जा चुका है।
साधना अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता डॉ. दयाराम (वैज्ञानिक, राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर) और बक्सा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुरेश कनौजिया से मिली प्रेरणा को देती हैं।
साथ ही उन्होंने बताया कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने भी उन्हें आर्थिक मदद देकर इस कार्य के लिए काफी प्रोत्साहित किया था।
मशरूम उत्पादन में सिरमौर बनीं साधना खरवार: एक नजर में
| विषय / पहलू | महत्वपूर्ण जानकारी |
| नाम एवं स्थान | साधना खरवार (ग्राम नरी, बक्सा, जिला जौनपुर) |
| समूह का नाम | जन कल्याण आजीविका स्वयं सहायता समूह (NRLM से संबद्ध) |
| शुरुआती निवेश व कमाई | मात्र ₹1,000 से शुरुआत; वर्तमान कमाई ₹1.5 से ₹2 लाख (प्रति सीजन) |
| उत्पादन क्षमता | 18 से 20 क्विंटल मशरूम प्रति सीजन |
| मशरूम की 5 किस्में | ऑयस्टर, बटन, मिल्की, प्रोटोविला और ऑयस्टर किंग |
| सामाजिक योगदान | 21 ब्लॉकों के लोगों को निःशुल्क ट्रेनिंग, ‘मिड-डे मील’ में आपूर्ति |
| सम्मान एवं सहयोग | पूर्व डीएम मनीष वर्मा द्वारा सम्मानित, KVK से ₹7,000 का पुरस्कार, पूर्व सांसद धनंजय सिंह द्वारा आर्थिक प्रोत्साहन |











